अप्रत्यक्ष कर में परिवर्तन के पश्चात् भारत सरकार के द्वारा प्रत्यक्ष कर ढाँचे के सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण पहल

भारत सरकार के द्वारा वस्तु एवं सेवा कर को लागू कर देश की अप्रत्यक्ष कर प्रणाली में भारी बदलाव लाया गया है। इसके पश्चात् कयास लगाये जा रहे थे कि सरकार के द्वारा प्रत्यक्ष कर प्रणाली में भी महत्वपूर्ण बदलाव लाया जायेगा। सरकार ने इन संभावनाओं को सही साबित किया है तथा 1961 में निर्मित आयकर कानून की समीक्षा करने के लिए एक टास्क फोर्स का गठन किया है। यह टास्क फोर्स अगले छः महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट केन्द्र सरकार को सौंपेगा।

  • वर्षों से लंबित जीएसटी को लागू कर देश की अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था में ऐतिहासिक परिवर्तन करने के बाद केन्द्र सरकार अब प्रत्यक्ष कर ढाँचे में सुधार की दिशा में बढ़ रही है।
  • इसके तहत सरकार नया आयकर कानून बनाने जा रही है। इस संबंध में केन्द्र ने एक टास्क फोर्स गठित की है। यह 56 साल पुराने आयकर कानून की समीक्षा करेगी।
  • इसके आधार पर सरकार एक नये प्रत्यक्ष कर कानून का मसौदा तैयार करेगी। माना जा रहा है कि नये कानून में मध्यवर्ग और उद्योग जगत को टैक्स में सीधे राहत देकर मांग एवं निवेश बढ़ाने के लिए कदम उठाये जा सकते हैं
  • मौजूदा आयकर कानून 1961 में बना था। तब से लेकर अक तक इसमें कईं बार संशोधन हो चुके हैं। यही वजह है कि प्रधनमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस साल 1-2 सितम्बर को नई दिल्ली में शीर्ष कर अधिकारियों के ‘राजस्व ज्ञान संगम’ में मौजूदा आयकर कानून की समीक्षा कर इसका मसौदा आयकर कानून की समीक्षा कर इसका मसौदा पुनः तैयार करने की जरूरत पर बल दिया था।
  • एक जुलाई की मध्यरात्रि को जीएसटी के शुभारंभ के मौके पर प्रधनमंत्री ने संसद के केन्द्रीय कक्ष में आयोजित कार्यक्रम में महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंसटीन के कथन ‘अगर दुनिया में कोई चीज समझना सबसे ज्यादा मुश्किल है तो वह आयकर है’ का उल्लेख किया था। यह कह करके उन्होंने यह स्पष्ट संकेत दिया था कि जीएसटी के बाद उनकी सरकार का लक्ष्य आयकर कानून में सुधार करना है।
  • उल्लेखनीय है कि वर्ष 2014 में सत्ता में आने से पूर्व भाजपा ने ‘टैक्स टैररिज्म’ से मुक्ति दिलाने का वादा भी किया था। इसी पृष्ठभूमि में ही सरकार ने यह टास्क फोर्स गठित की है।
  • केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के सदस्य (विधयी) अरविंद मोदी के नेतृत्व वाली यह छः सदस्यीय टास्क फोर्स विभिन्न देशों में प्रचलित प्रत्यक्ष कर प्रणालियों और सर्वश्रेष्ठ अंतर्राष्ट्रीय पद्धतियों का अध्ययन करेगी। इसके आधार पर देश की आर्थिक जरूरतों के हिसाब से उपयुक्त प्रत्यक्ष कर कानून का मसौदा तैयार करेगी।
  • टास्क फोर्स छः माह में अपनी रिपोर्ट सीबीडीटी को सौंपेगी। इस स्थिति में सरकार अगले आम चुनाव में जाने से पूर्व प्रत्यक्ष कर कानून में बदलाव की घोषणा कर सकती है। जानकारों का मानना है कि अगर इस मसौदे में जनता को आयकर से छूट की कुछ अहम सिफारिशें आती है तो उसका राजनीतिक लाभ भी मिलेगा।

सरकार के द्वारा गठित टास्क फोर्स :

  • टास्क फोर्स में पूर्व आइआरएस अधिकारी जीसी श्रीवास्तव, भारतीय स्टेट बैंक के गैर-अधिकारिक निदेशक और सीए गिरीश आहूजा, अर्न्स्ट एंड यंग के अध्यक्ष और क्षेत्रीय प्रबंधक राजीव मेमानी, कर अधिवक्ता मुकेश पटेल और आर्थिक थिंक टैंक इक्रियर की कंसल्टेंट मानसी केडिया को इसका सदस्य बनाया गया है। मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रह्ममण्यम इस टास्क फोर्स में स्थायी रूप से आमंत्रित सदस्य होंगे।
  • प्रत्यक्ष कर कानून में बदलाव इसलिए महत्वपर्ण है, क्योंकि सरकार का आधा कर राजस्व इन्हीं के माध्यम से आता है। वर्ष 2016-17 में कुल कर राजस्व 17,11,333 करोड़ रूपये रहा। इसमें प्रत्यक्ष करों के जरिए 8,49,818 करोड़ रूपये प्राप्त हुए।

आयकर कानून में सुधार के संबंध में ईश्वर समिति :

  • वर्तमान सरकार ने आयकर कानून 1961 के प्रावधानों को सरल बनाने के लिए 27 अक्टूबर, 2015 को दिल्ली के हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश आरवी ईश्वर की अध्यक्षता में 10 सदस्यीय समिति का गठन किया था। ईश्वर समिति ने जनवरी, 2016 में पहली और दिसम्बर, 2016 में दूसरी रिपोर्ट सरकार को सौंपी थी। ईश्वर समिति में  तीन सदस्य- राजीव मेमानी, मुकेश पटेल और अरविंद मोदी अब इस नई टास्क फोर्स में शामिल है।
  • ज्ञातव्य है कि लोकसभा में पहले भी प्रत्यक्ष कर संहिता बिल पेश किया गया था। तत्कालीन सप्रसंग सरकार ने भी आयकर कानून 1961 को बदलने के इरादे से 2009 में ‘प्रत्यक्ष कर संहिता’ बनाने की दिशा में कदम उठाया था।
  • उसने 2010 में ‘प्रत्यक्ष कर संहिता’ (डीटीसी) बिल भी संसद में पेश किया था। लेकिन पंद्रहवीं लोकसभा का कार्यकाल समाप्त होने के साथ ही यह विधेयक भी खत्म हो गया।
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