- बायोडीजल उत्पादन की पुरानी तकनीकी के अंतर्गत कृषि, घरों एवं उद्योगों से निकलने वाले कचरे को बायोडीजल में बदला जाता था। किंतु इस प्रक्रिया में कच्चा ग्लिसरॉल नामक व्यर्थ पदार्थ निकलता था जिसका निपटान संभव नहीं था।
- वैज्ञानिकों के द्वारा ईजाद की गयी बायोडीजल उत्पादन की इस नवीन तकनीकी के अंतर्गत कच्चे ग्लिसरॉल को हाइड्रोजन में परिवर्तित करना संभव हो गया है। ज्ञातव्य है कि हाइड्रोजन को ग्रीन ईंधन (Green Fuel) माना जाता है।
- वैज्ञानिकों ने कच्चे ग्लिसरॉल को हाइड्रोजन में परिवर्तित करने के लिए ‘बेसिलस एथिलोलिक्फाइंस सीडी 16’ नामक जीवाणु का प्रयोग किया।
- उन्होंने ‘बेसिलस एथिलोलिक्फाइंस सीडी 16’ नामक जीवाणु की मदद से कच्चे ग्लिसरॉल को ट्रीट किया और एक दिन में एक लीटर कच्चे ग्लिसरॉल से 3.2 लीटर हाइड्रोजन गैस ईंधन बनाने में सफलता प्राप्त की।
- वैज्ञानिकों ने कच्चे ग्लिसरॉल को हाइड्रोजन में परिवर्तित करने के लिए ‘बेसिलस एथिलोलिक्फाइंस सीडी 16’ नामक जीवाणु का प्रयोग किया।
- उन्होंने ‘बेसिलस एथिलोलिक्फाइंस सीडी 16’ नामक जीवाणु की मदद से कच्चे ग्ल्सिरॉल को ट्रीट किया और एक दिन में एक लीटर कच्चे ग्लिसरॉल से 3.2 लीटर हाइड्रोजन गैस ईंधन बनाने में सफलता प्राप्त की।
- उल्लेखनीय है कि 3.2 लीटर हाइड्रोजन गैस ईंधन से 37 किलोवाट घंटें ऊर्जा उत्पन्न की जा सकती है।
- सबसे बढ़कर यह नवीन तकनीकी न सिर्फ काफी सस्ती है बल्कि आसान भी है। ज्ञातव्य है कि कच्चा ग्लिसरॉल उद्योगों के लिए एक समस्या बना हुआ था। इस नवीन तकनीकी से कच्चे ग्लिसरॉल को आसानी से हाइड्रोजन में परिवर्तित किया जा सकता है।
बायोडीजल उत्पादन की इस नवीन तकनीकों को स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में महत्वपूर्ण क्यों माना जा रहा है?
- इस नवीन तकनीकों को स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में महत्वपूर्ण इसलिए माना जा रहा है कि इससे व्यर्थ पदार्थ कच्चे ग्लिसरॉल का समुचित निपटान संभव हो गया है। ज्ञातव्य है कि कच्चा ग्लिसरॉल पर्यावरण को प्रदूषित करता था।
- ‘एप्लाइड बायोकेमिस्ट्री एवं बायोटेक्नोलॉजी’ नामक जर्नल में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार वैश्विक स्तर पर प्रतिवर्ष 40 लाख टन बायोडीजल उत्पन्न होता है। इस कच्चे ग्लिसरॉल का निपटान अब आसानी से किया जा सकता है।
- सबसे बढ़कर इस कच्चे ग्लिसरॉल से स्वच्छ हाइड्रोजन गैस भी उत्पन्न की जा सकती है। उल्लेखनीय है कि हाइड्रोजन न सिर्फ उत्सर्जन वाला स्वच्छ ईंधन है बल्कि इसे भविष्य का ईंधन भी माना जा सकता है।
निष्कर्ष: निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि बायोडीजल उत्पादन की इस नवीन तकनीकी से न सिर्फ बायोडीजल उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा बल्कि कच्चे ग्लिसरॉल नामक पदार्थ का निस्तारण कर स्वच्छ हाइड्रोजन गैस ईंधन का उत्पादन भी संभव हो सकेगा।