हाल ही में एक वैश्विक रिपोर्ट से ज्ञात हुआ है कि भारत में वृद्धों की जनसंख्या तीव्र गति से बढ़ रही है। वृद्धों की बढ़ती जनसंख्या से उनके लिए उत्पन्न होनी वाली चुनौतियों का उल्लेख कीजिए। वृद्धोंकी समस्याओं के निराकरण के लिए सरकार द्वारा कौन-कौन से प्रमुख कदम उठाये गये हैं?

हाल ही में जारी की गयी ‘केयरिंग पफॉर अवर एल्डर्सः अर्ली रिस्पाँसेस, इंडिया एजिंग रिपोर्ट (Caring For Our Elders : Early Responses, India Ageing Report)* के अनुसार, भारत में वृद्धों की जनसंख्या तीव्र गति से बढ़ती जा रही है। वर्ष 2015 में भारत की कुल आबादी में से 60 वर्ष से अधिक लोगों की संख्या 8 प्रतिशत थी। इस रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि यदि वृद्धों की संख्या इसी गति से बढ़ती रही तो वर्ष 2050 तक भारत की कुल आबादी में 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों की संख्या कुल आबादी का 19 प्रतिशत हो जायेगी।

वृद्धों की बढ़ती जनसंख्या से वृद्ध लोगों के लिए उत्पन्न होने वाली चुनौतियाँ :

  • वृद्धों को आश्रित जनसंख्या की श्रेणी में रखा जाता है क्योंकि कार्यशील आबादी की श्रेणी 15 से 59 वर्ष की उम्र के लोगों के लिए निर्धारित की गयी है। आश्रित श्रेणी में होने के कारण वृद्धों की आर्थिक उपयोगिता नगण्य होती है अतः इन्हें अधिक महत्व नहीं दिया जाता है।
  • भूमण्डलीकरण के प्रभाव के कारण अधिकांश युवा शहरों की ओर प्रवास कर जाते हैं जिससे वृद्ध लोग अकेले रह जाते हैं और उनकी देखभाल समुचित ढंग से नहीं हो पाती है।
  • भारत में पुरुषों के मुकाबले महिलाओं की जीवन प्रत्याशा अधिक है। 2011 की जनगणना में प्रति 1000 वृद्ध पुरुषों पर 1033 वृद्ध महिलायें थी। इस कारण महिला वृद्धों को अधिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
  • ‘नाभिकीय परिवार (Nuclear Family)* की प्रणाली का प्रचलन बढ़ रहा है जिसमें पति, पत्नी एवं एक बच्चे को सामान्य तौर पर शामिल किया जाता है। ऐसे प्रचलन के कारण वृद्धों पर अधिक ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
  • वृद्धों एवं युवाओं के बीच पारस्परिक संवाद तथा  संचार में कमी आ गयी है। इसका प्रमुख कारण यह है कि अधिकांश वृद्धों में डिजिटल साक्षरता का अभाव है तथा वे वर्तमान की अत्यधिक मांग वाली उपभोक्तावादी जीवन-शैली को नहीं समझ पा रहे हैं।

वृद्धों की समस्या के निराकरण के लिए किये गये सरकारी प्रयास

  • सर्वप्रथम वर्ष 1999 में वृद्धों के लिए राष्ट्रीय नीति जारी की गयी। इस नीति में वृद्धों के स्वास्थ्य, खाद्य एवं वित्तीय सुरक्षा तथा आश्रय आदि के बारे में समुचित प्रबंध् के लिए राज्य के द्वारा प्रदान की जाने वाली सहायता का उल्लेख किया गया है।
  • वृद्धों के लिए ‘एकीकृत कार्यक्रम’ संचालित किया जा रहा है जिसके तहत पंचायती राज संस्थानों, अस्पतालों, र्ध्मार्थ संगठनों एवं गैर-सरकारी संगठनों को वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है ताकि वे वृद्धों को सुविधायें प्रदान कर सकें।
  • इसी प्रकार वृद्धों के लिए जीवन की गुणवत्तापूर्ण देखभाल अधिनियम, 2007 लागू किया गया है,  जिसमें वृद्ध माता-पिता एवं दादा-दादी की देखभाल के लिए कानूनी प्रावधन किये गये हैं।
  • सबसे बढ़कर वर्ष 2011 में वरिष्ठ नागरिकों पर राष्ट्रीय नीति, 2011 को जारी किया गया है जिसमें वृद्धों के लिए समुचित प्रावधान किये गये हैं ताकि उन्हें किसी समस्या का सामना न करना पड़े।

निष्कर्ष : निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि भारत में वृद्धों की आबादी तीव्र गति से बढ़ती जा रही है। वृद्धों की आबादी बढ़ने से उनके समक्ष कई प्रकार की समस्यायें सामने आ रही हैं। हालांकि इस सम्बंध में सरकार द्वारा कई प्रयास किये गये हैं किन्तु समस्या की गंभीरता के मद्देनजर अधिक प्रयासों की जरूरत है।

Posted on by