हाल के समय में नासा (NASA) का ?जूनो मिशन? कापफी चर्चा में रहा है। चर्चा में रहने का प्रमुख कारण यह है कि इसने बृहस्पति ग्रह की संरचना के संबंध् में कईं महत्वपूर्ण जानकारियाँ उपलब्ध् करवायी हैं। जूनो एक ?अंतरिक्ष शोध् यान? है जो वर्ष 2011 में प्रक्षेपित किया गया था तथा यह वर्ष 2018 में अपना कार्यकाल पूरा करने जा रहा है।

 हाल के समय में नासा (NASA) का ‘जूनो मिशन’ कापफी चर्चा में रहा है। चर्चा में रहने का प्रमुख कारण यह है कि इसने बृहस्पति ग्रह की संरचना के संबंध् में कईं महत्वपूर्ण जानकारियाँ उपलब्ध् करवायी हैं। जूनो एक ‘अंतरिक्ष शोध् यान’ है जो वर्ष 2011 में प्रक्षेपित किया गया था तथा यह वर्ष 2018 में अपना कार्यकाल पूरा करने जा रहा है।

नासा के जूनो मिशनके बारे में आप क्या जानते हैं?

  • नासा (NASA) का ‘जूनो मिशन’ बृहस्पति ग्रह की संरचना का अध्ययन करने के लिए अगस्त, 2011 में प्रक्षेपित किया गया एक अंतरिक्ष शोध् यान है।
  • ‘जूनो’ जुलाई, 2016 में बृहस्पति ग्रह की कक्षा में पहुँचने में सपफल रहा है।
  • ‘जूनो’ ने बृहस्पति ग्रह में स्वयं को ऐसी कक्षा में स्थापित किया है जो ठीक बृहस्पति ग्रह के ध्रुव से होकर जाती है।
  • ‘जूनो’ के द्वारा बृहस्पति ग्रह की बनावट, चुंबकीय क्षेत्र एवं मौसम के विषय में महत्वपूर्ण जानकारी एकत्रित कर पृथ्वी में भेजी गयी जिससे बृहस्पति ग्रह की संरचना को समझने में महत्वपूर्ण मदद प्राप्त हुयी है।
  • ‘जूनो’ की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसके द्वारा सूर्य की धीमी रोशनी का प्रयोग करके ही अपनी बिजली संबंधी जरूरत को पूरा किया जायेगा जबकि हमें ज्ञात है कि बृहस्पति गृह पर सूर्य की रोशनी न के बराबर पहुँचती है क्योंकि दोनों के बीच दूरी कापफी अधिक है। अभी तक ऐसे मिशनों के लिए परमाणु ऊर्जा का प्रयोग किया जाता था।

पृथ्वी एवं अन्य ग्रहों की उत्पत्ति को समझने  जूनो’  किस  प्रकार  सहायक  होगा?

  • यद्यपि ‘जूनो मिशन’ का उद्देश्य बृहस्पति ग्रह के संबंध् में जानकारी एकत्रित करना था किन्तु यह पृथ्वी एवं अन्य ग्रहों की उत्पत्ति को समझने में भी मददगार है।
  • ज्ञातव्य है कि बृहस्पति ऐसा ग्रह है जिसकी उत्पत्ति तारों एवं सौरमण्डल के निर्माण के समय एक संक्रमण काल (Transition Phase)में हुयी।
  • फिर बृहस्पति ग्रह के विशाल आकार के कारण इसके भारी गुरूत्वाकर्षण बल ने अपने चारों ओर सौर-प्रणाली को आकार प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की।
  • कई वैज्ञानिकों का मानना है कि बृहस्पति ग्रह की धूल-भरी गतिविधि (Dust busting activity)  ने बुध्, शुक्र, मंगल आदि ग्रहों के साथ पृथ्वी की उत्पत्ति के लिए एक प्लेटपफार्म तैयार किया।
  • सबसे बढ़कर बृहस्पति ग्रह में स्वयं सूर्य की तरह हाइड्रोजन एवं हीलियम की प्रमुखता है। किन्तु इसमें भारी तत्वों की उपस्थिति भी है जो स्थलीय ग्रहों के निर्माण के लिए जरूरी होते हैं।
  • इस प्रकार बृहस्पति ग्रह, सौरमण्डल की उत्पत्ति को समझने में अहम भूमिका अदा करता है।

जूनो मिशन वस्तुतः बृहस्पति के अध्ययन पर ही केन्द्रित है किन्तु इससे पृथ्वी एवं अन्य ग्रहों की उत्पत्ति को समझने में भी मदद मिलती है। इसका कारण यह है कि पृथ्वी सौरमण्डल का महत्वपूर्ण ग्रह है तथा सभी ज्ञात ग्रहों में यहीं पर जीवन का पता लगाया जा सका है।

निष्कर्ष : निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि नासा का ‘जूनो मिशन’ बृहस्पति ग्रह की संरचना को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रहा है। सबसे बढ़कर इससे पृथ्वी सहित अन्य ग्रहों की उत्पत्ति को समझने में भी मदद मिलेगी।

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