कोष्ठक चिह्न एवं लाघव चिह्न का प्रयोग

कोष्ठक चिह्न :

               वाक्य में आये शब्द चिह्न को अधिक स्पष्ट करने के लिए कोष्ठकों का व्यवहार होता है। उल्लेखनीय है कि साहित्य सम्बन्धी लेखन में छोटे कोष्ठक ( ) का ही प्रयोग होता है।

               वाक्य में प्रयुक्त किसी शब्द का समानार्थी शब्द देने के लिए अथवा किसी शब्द या वाक्यांश को अधिक स्पष्ट करने के लिए कोष्ठक का प्रयोग किया जाता है।

जैसे-  

1.            भूमण्डलीय (ग्लोबलाइजेशन) के विषय में बहुत भ्रान्तियाँ तथा विवाद है।

2.            प्रो0 सत्य प्रकाश मिश्र (हिन्दी साहित्य सम्मेलन के साहित्य मंत्री) ख्याति प्राप्त आलोचक और विचारक है।

3.            डा0 ए0पी0जे0 अब्दुल कलाम (भारत के राष्ट्रपति) राजनीतिक कम चिंतक अधिक है।            

लाघव चिह्न (0):

               किसी शब्द को संक्षेप में लिखने के लिए उस शब्द का पहला अक्षर लिखकर शून्य (0) लगा देते है, इसे ही लाघव चिह्न कहते है। इसका प्रयोग शब्द संक्षेप लिखने में किया जाता है।

जैसे-   डी0फिल0 (डाॅक्टर आॅफ फिलोस्फी)

               पी0एच0डी0 (डाॅक्टर आॅफ फिलोस्फी)

               यह एक उपाधि है जो परास्नातक करने के बाद किसी विषय पर शोधपूर्ण ग्रन्थ लिखने अथवा महत्वपूर्ण खोज करने पर उस विश्वविद्यालय के कुलाधिपति द्वारा प्रदान की जाती है।

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