निर्देश चिह्न (-),विवरण चिह्न/आदेश चिह्न (ः-) एवं अपूर्ण बोध या लोप निर्देश चिह्न (XXX..................X) का प्रयोग

निर्देश चिह्न (-):

               इसे रेखिका चिह्न भी कहते है, इसका प्रयोग निम्नलिखित स्थितियों में किया जाता है।

1.            उद्धरण के अन्त में, लेखक के नाम के पहले।

               जैसे- ”विवेक और संवेदना के योग का नाम आलोचना है“        -राजेन्द्र कुमार

2.            यथा या जैसे के बाद

3.            वाक्यों, वाक्यांशो अथवा पदों के मध्य विशिष्ट सम्बन्ध या भाव व्यक्त करने के लिए।

               जैसे- तुम खेल रहे हो, खेलो -पर बाबूजी की बातों का ध्यान रखना।

4.            कथोप कथन (कथन/उपकथन/सम्वाद) में नाम के आगे रेखिका चिह्न लगाया जाता है।

               जैसे- द्वारपाल-महाराज! एक वृद्ध आपके दर्शन का अभिलाषी है।

                              महाराज-उसे सादर मेरे समक्ष लाओ।

विवरण चिह्न/आदेश चिह्न (ः-):

               किसी विषय को आदि क्रमवार लिखना हो, तो विषय क्रम व्यक्त करने के पहले इसका प्रयोग किया जाता है। जैसे- (1) इस कहानी की प्रमुख विशेषताएँ इस प्रकार है:-,  (2) अवकाश सम्बन्धी संशोधित नियम निम्नवत है:-

अपूर्ण बोध या लोप निर्देश चिह्न (XXX....................................X) :

               जब लेखक उदाहरण देते समय कुछ बाते छोड़कर आगे बढ़ना चाहता है या असम्बन्ध बातों का उल्लेख नहीं करना चाहता तब, अपूर्ण बोध या लोप निर्देश चिह्न का प्रयोग किया जाता है।

जैसे:   अधिकार सुख कितना मादक और .....................................है।

               तुम भूल गये पुरुषत्व मोह में,

               कुछ सत्ता है नारी की

               XXX.....................................X

               अधिकार और अधिकारी की

               नवगति, नव लय, तल छन्द नव,

               नवल कण्ठ, जब जलद मन्द रव

               XXXX.......................................X

               नब पर, नव स्वर दे

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