वाक्यभेद

वाक्य के भेदों का निर्धारण दो दृष्टियों से किया गया है-

1.            रचना या बनावट की दृष्टि

2.            अर्थ की दृष्टि से

1.            रचना या बनावट की दृष्टि से वाक्य भेद-

               रचना या बनावट की दृष्टि से वाक्य के निम्नलिखित तीन भेद है-

               (क) सरल वाक्य        (ख) संयुक्त वाक्य     (ग) मिश्रवाक्य

(क)    सरल वाक्य : जिस वाक्य में एक कर्ता एवं एक क्रिया हो, सरल वाक्य कहलाता है।

               जैसे-मोहान कविताएँ पढ़ता है।

               बच्चे मैदान में खेल रहे है।

               पानी बरस रहा है।

(ख)    संयुक्त वाक्य : जहाँ दो या दो से अधिक उपवाक्य किसी समुच्चयबोधक अव्यव से जुड़े हो, संयुक्त वाक्य कहलाता है। प्रमुख समुच्चयबोधक अव्यय है-और, तथा, एवम्, इसलिए, अतः, किन्तु, परन्तु, या, नहीं अन्यथा, वरना।

जैसे-   हमने सुबह से शाम तक बाजार में खाक छानी किन्तु काम नहीं बना। जल्दी चलिए अन्यथा देर हो जाएगी। इधर अध्यापक कक्षा में पहुँचे और उधर विद्यार्थी एक-एक करके जाने लगे।

(ग)    मिश्र वाक्य : जिन वाक्यों की रचना एक से अधिक ऐसे उपवाक्यों से हुई हो, जिनमें एक प्रधान वाक्य हो तथा दूसरा आश्रित उपवाक्य हो, मिश्र वाक्य कहलाता है।

जैसे-   हिरण ही एकमात्र ऐसा वन्य पशु है, जो कुलाँचे भरता है। श्यामलाल जो निराला नगर, भोपाल में रहते है, मेरे अभिन्न मित्र है।

नोट:(1) प्रायः मिश्रवाक्य में कि, जिसे, उसे, इसलिए, ऐसा, ज्यों, वही, जिसे, यदि .......तो, जो.....वह जैसे योजकों का प्रयोग होता है।

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