अर्थ की दृष्टि से वाक्य भेद

अर्थ की दृष्टि से वाक्य भेद

               अर्थ की दृष्टि से वाक्यों के निम्न आठ प्रमुख भेद है- 

(1)          विधानवाचक वाक्य

(2)          निषेदवाचक वाक्य

(3)          प्रश्नवाचक वाक्य

(4)          विस्मयादिबोधक वाक्य

(5)          आज्ञावाचक वाक्य

(6)          इच्छावाचक वाक्य

(7)          सन्देहवाचक वाक्य

(8)          संकेतवाचक वाक्य

(1)          विधानवाचक वाक्य: जिन वाक्यों से किसी क्रिया के करने या होने की सामान्य सूचना मिलती है, उन्हें विधानवाचक वाक्य कहते है। इस प्रकार के वाक्यों से किसी के अस्तित्व का बोध भी होता है।

               जैसे- जनता ने नेता जी का स्वागत किया। मैं दिल्ली गया था। सूर्य पूर्व में उदित तथा पश्चिम में अस्त होता है।

(2)          निषेदवाचक वाक्य: जिन वाक्यों से किसी कार्य के निषेद का बोध हो, यानि किसी कार्य के न होने का बोध हो, उन्हें निषेदवाचक वाक्य कहत है।

               जैसे- आज हिन्दी के अध्यापक ने कक्षा नही ली। मैं निराला की कविताएँ और प्रेमचन्द्र के उपन्यास नहीं पढ़ता हूँ।

नोट: निषेदवाचक वाक्यों को नकारात्मक वाक्य भी कहते है। प्रायः ऐसे वाक्यों में ‘न’ या ‘नही’ जैसे शब्द निषेधसूचक होते है।

(3)          प्रश्नवाचक वाक्य: जिन वाक्यों में प्रश्न विचार किया जाये उन्हें प्रश्नवाचक वाक्य कहते है। दूसरे शब्दों में - जिन वाक्यों से प्रश्न पूछे जाने का बोध हो, प्रश्नवाचक वाक्य कहलाते है। उदाहरण-क्या तुम खेलने जाओगी?, वह दिल्ली कब जायेगा?
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