योजक चिह्न के प्रयोग की निम्नलिखित स्थितियाँ है-
5. जब दो संयुक्त क्रियाएँ एक साथ लिखी जाये, तो दोनों के बीच योजक चिह्न का प्रयोग किया जाता है। जैसे- पढ़ना-लिखना, मारना-पीटना, खाना-पीना, जीना-मरना आदि।
6. जब एक ही संज्ञा शब्द का दोहराव हो तो दोनों संज्ञाओं के बीच योजक चिह्न का प्रयोग किया जाता है। जैसे- गली-गली, नगर-नगर, घर-घर, कोना-कोना, चप्पा-चप्पा आदि।
7. क्रिया की मूल धातु के साथ आई हुई प्रेरणार्थक क्रियाओं के बीच योजक चिह्न का प्रयोग होता है। जैसे- डरना-डराना, चलना-चलाना।
8. परिणामवाचक और रीतिवाचक क्रिया विशेषण से प्रयुक्त दो अवयवों तथा -ही, -से, -का, -न आदि के बीच योजक चिह्न का प्रयोग होता है। जैसे- आप-से-आप, ज्यों-का-त्यों, कुछ-न-कुछ, किसी-न-किसी।
9. यदि निश्चित संख्यावाचक विशेषण के दो शब्द एक साथ प्रयुक्त हो तो दोनों के बीच योजक चिह्न लगता है। जैसे- एक-एक, दस-बारह, पहला-दूसरा, चैथा-पाँचवा।
10. अनिश्चित संख्यावाचक विशेषण में भी जब, सा, सी, से आदि जोड़े जाये तो दोनों के बीच योजक चिह्न लगाया जाता है। जैसे- कम-से-कम, बहुत-सी-बाते, अधिक-से-अधिक, थोड़ा-सा-काम।
11. गुणवाचक विशेषण में भी ‘सा’ जोड़कर योजक चिह्न का प्रयोग किया जाता है। जैसे- बड़ा-सा-पेड़, ठिगना-सा-आदमी, ताड़-सी-लम्बी औरत।
12. जब दो शब्दों के बीच सम्बन्ध कारके के परसर्ग (विभक्ति)। जैसे-का, के, की लुप्त हो अथवा अनुक्त हो (जो कहा न गया हो) तो दोनों के बीच योजक चिह्न लगाया जाता है। जैसे- प्रकाश-का-स्तम्भ, लेखन शब्द सागर, मानव-शरीर, विचार-श्रृंखला।
13. लिखते समय आदि कोई शब्द पंक्ति के अन्त से पूरा न लिखा जा सके तो, सके पहले आधे खण्ड को पंक्ति के अन्त में रखकर उसके बाद योजक चिह्न लगाते है।
जैसे-प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी देश के लिए अच्छे-से-अच्छे कार्य-क्रम की योजना बनाते है। खाने में रोटी और चने का उप- योग अधिक करे।