बोली और भाषा में अन्तर

बोली और भाषा में अन्तर

  • बोली और भाषा के मध्य विभाजक रेखा खींची भले जाती है, किन्तु जो भी अन्तर है वह वास्तविक कम, व्यावहारिक ज्यादा है।
  • कोई भी बोली परिस्थितियों के कारण भाषा बनने की सामथ्र्य रखती है।
  • मोटे तौर पर देखें तो बोली का क्षेत्र सीमित, भाषा का विस्तृत, व्यापक होता है।
  • एक बोली के क्षेत्र में अनेक भाषाएँ नहीं हो सकतीं, एक भाषा क्षेत्र में अनेक बोलियाँ हो सकती हैं।

स्मरणीय तथ्य

  • क्रिया विशेषण पदबन्ध को अलग करने के लिए भी, जैसे-वह खूब डाँटने पर भी, नहीं मानता।
  • , नहीं, सम्बोधन, विस्मयादि बोधक शब्द के बाद भी प्रयोग होता है-अरे ललित, तुम हो आए?
  • उद्धरण से पूर्व अल्प विराम का प्रयोग होता है-वह बोला, ‘आइए श्रीमान्’।
  • तारीख को सन्-संवत से अलग करने के लिए-15 अगस्त, 1947।

अर्द्ध विराम- (;) जहाँ दो शब्दों के बीच अल्प विराम लगाने से भ्रान्ति की संभावना हो, वहाँ लगाया जाता हैं-पिताजी ने; मेरी जरूरत पर, रूपये भेजे थे।

प्रश्न सूचनक चिह्न-(?) सीधे प्रश्न के बाद लगाया जाता है-बहिन कब तक आएगी?

जिसके उत्तर की जरुरत न हो, जो सीधा प्रश्न न हो-वहाँ प्रश्नसूचनक चिह्न का प्रयोग नहीं होता-रमा ने पूछा कि शंकर कहाँ है।

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