साहित्य (काव्य) वस्तुतः जीवन की आलोचना है।’-मैथ्यु अर्नाल्ड
'कविता मनुष्यता की मातृभाषा है।' -कार्ल माक्र्स
1 हिन्दी का ‘आदि कवि’ (प्रथम कवि) ‘सरहपा’ को कहा जाता है।
2 हिन्दी काव्य साहित्य का प्रथम उत्थान काल आदिकाल है। इसके अन्य प्रचलित नाम वीरगाथा काल, चारण काल, सिद्ध सामन्त काल तथा बीजबपन काल हैं।
3 आदि काल का प्रमुख ग्रन्थ रासोकाव्य है। रासो काव्य का प्रधान रस वीर है तथा दूसरा मुख्य रस श्रृंगार है।
4 आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने चन्दबरदाई (पृथ्वीराज रासो) को हिन्दी का प्रथम महाकवि माना है।
5 भक्तिकाल को ‘हिन्दी साहित्य का स्वर्णकाल’ कहा जाता है।
6 निर्गुण भक्ति काव्यधारा, ज्ञानाश्रयी शाखा (प्रवर्तक-कबीर) तथा प्रेमाश्रयी शाखा (प्रवर्तक-मलिक मोहम्मद जायसी) सूफी काव्य में विभक्त है।
7 सगुण भक्ति काव्य धारा की दो मुख्य शाखाएँ-राम भक्ति काव्य धारा (प्रवर्तक-रामानुज, रामानन्द, श्रेष्ठतम कवि-तुलसीदास) तथा कृष्ण भक्ति काव्य धारा (प्रवर्तक- वल्लभाचार्य, श्रेष्ठ प्रतिनिधि कवि-सूरदास) है।
8 आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी ने कबीर को ‘वाणी का डिक्टेटर’ कहा है।
9 आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने महाकवि सूरदास को ‘वात्सल्य रस सम्राट’ कहा है।
10 जार्ज अब्राहम ग्रियर्सन ने तुलसीदास को ‘भारत का लोकनायक’ कहा है।
11 जायसी ‘प्रेम के पीर’ कहे जाते हैं। विजयदेव नारायण साही ने इन्हें ‘कुज़ात सूफ़ी’ कहा है।