हिन्दी साहित्य: स्मरणीय प्रमुख तथ्य-3

26     प्रयोगवाद के प्रवर्तक कवि सच्चिदानन्द हीरानन्द वात्स्यायन ‘अज्ञेय’ हैं। (संपादक-तारसप्तक-4 भागों में)

27     ‘अज्ञेय’ ने प्रयोगवादी कवियों को ‘नये राहों का अन्वेषी’ कहा है।

28     सर्वेश्वर दयाल सक्सेना नयी कविता के प्रतिनिधि कवि माने जाते है।

29     आधुनिक कवियों में त्रिलोचन अपने साॅनेट्स ;ैवददमजेद्ध के लिए विशेष प्रसिद्ध है।

30     ‘निराला’ को रमेशचन्द्र शाह ने ‘भाषा का किसान’ कहा है।

31     भारतेन्दु युग में काव्य की प्रमुख भाषा खड़ी बोली हिन्दी थी।

32     खड़ी बोली हिन्दी को परिष्कृत, परिमार्जित तथा साहित्यिक रूप देने का श्रेय आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी और उनके द्वारा सम्पादित पत्रिका ‘सरस्वती’ को जाता है। -इण्डियन प्रेस, इलाहाबाद

33     डाॅ0 नागेन्द्र ने द्विवेदी युग को ‘जागरण सुधार काल’ कहा है। हिन्दी को नवजागरण का अग्रदूत हरिश्चन्द्र को कहा जाता है। भारतेन्दु युग को नवजागरण काल कहा जाता है। नवजागरण शब्द का प्रथम प्रयोग डाॅ0 रामविलाष शर्मा ने किया।

34     विचारात्मक निबन्धों में समास शैली का प्रयोग होता है।

35     भावात्मक निबन्धों को ‘गद्य काव्य’ कहा जाता है।

36     धर्मवीर भारती का ‘अन्धा युग’ गीतिनाट्य विद्या की रचना है।

37     रेखाचित्र का अभ्युदय छायावाद युग से माना जाता है। (अतीत के चलचित्र-महादेवी वर्मा)

38     हिन्दी में ‘इन्टरव्यू’ विद्या के सूत्रधार बनारसीदास चतुर्वेदी हैं।
Posted on by