हाल ही में जारी की गयी विश्व आर्थिक फोरम की लैंगिक अंतराल सूचकांक की रिपोर्ट से ज्ञात होता है कि महिला कार्यबल के साथ आर्थिक क्षेत्र में कई प्रकार से विभेद किया जाता है। यह विभेद विकासशील देशों के साथ-साथ विकसित देशों में भी विद्यमान है।
आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन (OECD) के एक अध्ययन में यह तथ्य सामने आया है कि महिला कार्यबल की आर्थिक क्षेत्र में समुचित भागीदारी न होने के कारण तकरीबन 13 ट्रिलियन डॉलर का नुकसान प्रतिवर्ष वैश्विक जीडीपी को होता है। दूसरे शब्दों में यदि महिलाओं को कार्यबल में समुचित भागिदारी दे दी जाती है तो वैश्विक जीडीपी में 13 ट्रिलियन डॉलर की बढ़ोतरी की जा सकती है।
महिला कार्यबल के साथ किन मामलों में विभेद किया जाता है?
- महिला कार्यबल को आर्थिक क्षेत्र में बहुत ही कम मामलों में सीमित रखा जाता है जबकि पुरूषों को प्रत्येक क्षेत्र में बेहतर भागीदारी प्रदान की जाती है। महिलाओं को प्रायः शिक्षा, चिकित्सा, काउंसिलिंग एवं गृहस्थी सम्बंधी कार्यों के लिए ही उपयुक्त माना जाता है।
- इसी प्रकार महिला कार्यबल को लगभग प्रत्येक क्षेत्र में उनके पुरूष सहकर्मी की तुलना में काफी कम वेतन या मेहनताना दिया जाता है जबकि महिला कार्यबल के द्वारा भी उसी निपुणता एवं कुशलता से कार्य को पूरा किया जाता है जैसा कि किसी पुरूष कार्यबल के द्वारा।
- सबसे बढ़कर सामाजिक रूढ़ियों एवं परम्परा के कारण महिलाओं को सिर्फ घरों तक सीमित रखने का प्रयास किया जाता है जिससे उनके आगे बढ़ने के अवसर काफी सीमित हो जाते हैं। अरब क्षेत्र के देशों में तथा कुछ हद तक भारत के पिछड़े क्षेत्रों में महिलाओं के उपर ऐसे ही प्रतिबंध आरोपित किये जाने का सिलसिला जारी है।
महिला कार्यबल के साथ किये जाने वाले विभेद से उत्पन्न होने वाली समस्यायें:
- महिला कार्यबल के साथ किये जाने वाले विभेद से आर्थिक क्षेत्र महिलाओं की प्रतिभा एवं कौशल से वंचित रह जाता है। ज्ञातव्य है कि महिलायें दुनिया की आबादी का लगभग आधा हिस्सा हैं। यदि महिला कार्यबल को समुचित भागीदारी नहीं प्रदान की जायेगी तो वैश्विक जीडीपी पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
- महिला कार्यबल की समुचित भागीदारी न होने से महिला उपभोक्ताओं की माँगों को समझने एवं उन्हें पूरा करने में समस्या आयेगी। ज्ञातव्य है कि सफल उपभोक्ताओं में आधी भागीदारी महिला उपभोक्ताओं की ही है।
- सबसे बढ़कर महिला कार्यबल की समुचित भागीदारी न होने से उनका आर्थिक सशक्तिकरण नहीं होगा।
उल्लेखनीय है कि महिलायें जब तक आर्थिक रूप से सक्षम नहीं होंगी तब तक उनका सामाजिक सशक्तिकरण नहीं हो सकता है।
निष्कर्षः- निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि विश्व आर्थिक फोरम की हालिया रिपोर्ट विकसित एवं विकासशील दोनों ही देशों में महिला कार्यबल के साथ विभेद को दर्शाती है। आर्थिक क्षेत्र में महिलाओं के साथ किये जाने वाले विभेद से उनके सामाजिक सशक्तिकरण में भी कई प्रकार की समस्यायें सामने आ रही हैं।