ओखी एक उष्णकटिबंधीय चक्रवात था जिसने हाल ही में दक्षिण भारत में भारी तबाही मचायी। ओखी चक्रवात को वर्ष 2017 का तीसरा सबसे शक्तिशाली चक्रवात माना जा रहा है। ज्ञातव्य है कि ओखी चक्रवात से पहले वर्ष 2015 में अरब सागर में मेघ नामक चक्रवात उत्पन्न हुआ था। भारत में सामान्यतः अधिकांश चक्रवात बंगाल की खाड़ी में उत्पन्न होते हैं किंतु ओखी चक्रवात अरब सागर में उत्पन्न हुआ। ओखी चक्रवात के कारण केरल एवं तमिलनाडु राज्य में लगभग 220 लोगों की मृत्यु हुयी।
ओखी चक्रवात को असाधारण क्यों माना जा रहा है?
- ओखी चक्रवात भारी तीव्रता वाला उष्णकटिबंधीय चक्रवात था जो कि अरब सागर में उत्पन्न हुआ जबकि अधिकांश उच्च तीव्रता वाले चक्रवात बंगाल की खाड़ी में उत्पन्न होते हैं।
- ओखी चक्रवात ने लक्षद्वीप समूह के उपर से गुजरने के बाद भी अपनी उच्च तीव्रता को बनाये रखा। ज्ञातव्य है कि जलीय क्षेत्र के बाद जब चक्रवात जमीनी क्षेत्र में प्रवेश करता है तो उसकी तीव्रता में कमी आती जाती है किंतु ओखी चक्रवात की तीव्रता में कमी नहीं आयी।
- चूँकि ओखी चक्रवात तटीय क्षेत्रों के नजदीक उत्पन्न हुआ जिसके कारण इस चक्रवात के बारे में अर्ली वार्निंग नहीं जारी की जा सकी।
अरब सागर की तुलना में बंगाल की खाड़ी में अधिक चक्रवात क्यों उत्पन्न होते हैं?
- उष्णकटिबंधीय चक्रवात हमेशा पूर्व से पश्चिम की ओर गति करते हैं। इस कारण से अरब सागर में उत्पन्न होने वाले अधिकांश चक्रवात तटीय क्षेत्रों तक नहीं पहुँच पाते। जबकि बंगाल की खाड़ी के चक्रवात भारत के पूर्वी तटीय क्षेत्रों को प्रभावित करते हैं।
- उष्णकटिबंधीय चक्रवात की उत्पत्ति के लिए लगातार तापीय ऊर्जा की जरूरत पड़ती है। चूँकि बंगाल की खाड़ी में लगातार तापीय ऊर्जा के कारण उष्णकटिबंधीय चक्रवात उत्पन्न होते हैं जबकि अरब सागर में लगातार तापीय ऊर्जा नहीं मिल पाती है जिससे उष्णकटिबंधीय चक्रवात के लिए समुचित परिस्थिति नहीं बन पाती है।
- बंगाल की खाड़ी में चक्रवातों की बारम्बारता के पीछे प्रशांत महासागर में उत्पन्न होने वाले निम्न दाब क्षेत्रों की भी भूमिका होती है। ज्ञातव्य है कि प्रशांत महासागर के निम्न दाबीय क्षेत्र भी बंगाल की खाड़ी की ओर गति करते हैं।
- प्रायद्वीपीय भूभाग भी चक्रवातों की उत्पत्ति में अहम भूमिका अदा करता है। बंगाल की खाड़ी में उत्पन्न होने वाले चक्रवात भारत के पूर्वी तटीय क्षेत्र को पारकर जब जमीनी क्षेत्र में प्रवेश करते हैं तो उनकी ऊर्जा लगभग समाप्त हो जाती है। इस प्रकार बंगाल की खाड़ी के निम्न दाबीय क्षेत्र की अरब सागर में नगण्य भूमिका होती है।
निष्कर्षः- निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि ओखी चक्रवात के कारण दक्षिण भारत को भारी क्षति उठानी पड़ी है। बंगाल की खाड़ी में अरब सागर की तुलना में अधिक चक्रवात आने का कारण चक्रवातों की दिशा, भौगोलिक स्थिति तथा लगातार मौजूद तापीय ऊर्जा है।