लाइट हाऊस के विषय में आप क्या जानते हैं, सविस्तार स्पष्ट कीजिए? लाइट हाऊस एवं समुद्री संचार के सम्बंधितसंचार प्रणाली के विभिन्न रूपों का उल्लेख कीजिए। साथ ही बताइए कि लाइट हाऊस के मामले में भारत की क्या स्थिति है?

समुद्री जहाजों एवं नाविकों आदि को दिशा की जानकारी प्रदान करने के लिए विशाल समुद्रों के किनारे एक ऊँचा स्तम्भ स्थापित किया जाता है तथा इस ऊँचे स्तम्भ पर एक द्वीप जलाया जाता है। इस ऊँचे स्तम्भ को प्रकाश स्तम्भ या लाइट हाऊस कहते हैं।

ज्ञातव्य है कि इस लाइट हाऊस को लैंप एवं लेंस से  बनाया जाता है जिसके कारण यह तीव्र रोशनी उत्पन्न करने में सक्ष्म होता है। सामान्यतः लाइट हाऊस का निर्माण खतरनाक समुद्री तट रेखाओं, बंदरगाहों के पास एवं समुद्री छिछले पानी आदि स्थानों पर किया जाता है। भारत में भी कई प्रकाश स्तम्भ किये गये हैं।

लाइट हाऊस एवं समुद्री संचार से सम्बंधित विभिन्न संचार प्रणालियाँ:

  • लाइट हाऊस के अतिरिक्त अबाध समुद्री आवाजाही को सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न प्रकार की संचार प्रणालियों का प्रयोग किया जाता है। ये संचार प्रणालियाँ निम्नलिखित हैं-
  • समुद्री संचार प्रणाली में बोया का प्रमुख स्थान है। बोया एक ऐसी प्रणाली है जिसे समुद्र के तल से समुद्र के ऊपरी जल स्तर तक बांध जाता है। ये विभिन्न रंगों के होते हैं तथा इन पर टॉप मार्क एवं लाइट भी लगायी जाती है।
  • रेकॉन (रडार-ट्रांसपोंडर)  भी इस सम्बंध में उल्लेखनीय है। यह एक प्रकार का रिसीवर ट्रांसमीटर है। इसका प्रयोग जहाजों के मार्ग की बाधाओं को दूर करने तथा समुद्रों में  स्थित खतरनाक स्थलों से बचाव के लिए किया जाता है।
  • समुद्री संचार को सुगम बनाने में डीजीपीएस स्टेशनों का भी अहम स्थान होता है। डीजीपीएस स्टेशन कमजोर समुद्री सिग्नलों को शक्तिशाली सिग्नलों में परिवर्तित करता है।
  • समुद्री संचार के क्षेत्र में नवटेक्स प्रणाली बहुत अहम स्थान रखती है। नवटेक्स प्रणाली पोर्ट परिवहन के लिए मौसम सम्बंधी चेतावनी जनसूचना और जहाज की महत्वपूर्ण सूचनाओं हेतु एक अंतर्राष्ट्रीष्य स्वचालित सेवा है। यह प्रणाली रेडियो टेलेक्स का उपयोग करके स्थनीय समुद्री सुरक्षा सूचना स्वतः प्रसारित करती है। इस प्रणाली की शुरूआत वर्ष 1993 में हुयी। इस प्रणाली को अंतर्राष्ट्रीय जल क्षेत्र में चलने वाले सभी जहाजों के लिए अपनाना जरूरी है।
  • समुद्री संचार से सम्बंधित विभिन्न प्रणालियों में ई-लोरेन प्रणाली का भी महत्वपूर्ण स्थान है। ई-लोरेन प्रणाली से तात्पर्य लॉंग रेंज नेविगेशन प्रणाली से है। यह एक स्वतंत्र, ग्लोबल नौवहन प्रणाली से जुड़ी हुयी है। सबसे बढ़कर यह जीपीएस, गैलीलियो, जीएलओ एवं जीएनएसएस प्रणाली से पूरी तरह स्वतंत्र है। यह प्रणाली विमान लैंडिंग के साथ-साथ कमदृश्यता की स्थिति में जहाजों को बंदरगाहों तक सुरक्षित पहुंचाने का काम करती है।

लाइट हाऊस के मामले में भारत की स्थितिः

  • भारत में अनेक लाइट हाऊस हैं। इनकी देखरेख दीपस्तंभ एवं दीपपोत निदेशालय के द्वारा की जाती है।
  • लाइट हाऊस के सुचारू रूप से संचालन के लिए इन्हें कुल 9 क्षेत्रों में बाँटा गया है।
  • भारत में कुल 185 लाइट हाऊस हैं जिनमें से सर्वाधिक 32 लाइट हाऊस तमिलनाडु में, आन्ध्र प्रदेश में 17, तमिलनाडु में 22, गोवा में 1, कच्छ में 7, केरल में 22, कोलकाता में 1, मुंबई में 13 तथा ओडिशा में 6 लाइट  हाऊस हैं। कुछ लाइट हाऊस अन्य छोटे-छोटे स्थानों पर भी स्थापित हैं।

निष्कर्षः- निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि लाइट हाऊस की समुद्री संचार को सुगम बनाने में अहम भूमिका है। लाइट हाऊस के साथ-साथ बोया, रेकॉन, डीजीपीएस, नवटेक्स एवं ई-लोरेन प्रणाली भी समुद्री संचार को अबाध एवं सुगम बनाने में महत्वपूर्ण है।

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