पश्चिम एशिया का क्षेत्र तेल कूटनीति के साथ-साथ शिया - सुन्नी संघर्ष तथा इजरायल एवं फिलीस्तीन संघर्ष के लिए भी जाना जाता रहा है। शीतयुद्ध के दौरान भारत ने शिया समर्थक ईरान एवं सुन्नी समर्थक सउदी अरब दोनों के साथ सशक्त सम्बंध बनाये रखा।
भारत के द्वारा हमेशा इस बात का ध्यान रखा गया है कि पश्चिम एश्यिाई देशों के साथ सम्बंधों को मजबूत बनाये रखा जाये। सबसे बढ़कर भारत फिलीस्तीन से सम्बंधों को बिना बिगाड़े इजरायल के साथ द्विपक्षीय सम्बधों को मजबूत बनाने में भी सफल रहा है।
पश्चिम एशिया के वर्तमान हालात भारत के लिए चिंताजनक क्यों हैं?
- पश्चिम एशिया में लगातार बदलाव देखने को मिल रहा है। यमन में ईरान एवं सउदी अरब दोनों अलग-अलग धड़ों को प्रोत्साहित कर संघर्ष को बढ़ावा दे रहे हैं।
- इसी प्रकार सीरिया, लीबिया एवं इराक में लगातार संघर्ष की स्थिति बनी हुयी है। इस स्थिति को आईएसआईएस नामक आतंकी संगठन ने और अधिक जटिल बना दिया है।
- इस प्रकार की अनिश्चित स्थिति भारत के लिए गंभीर चिंता का विषय है क्योंकि पश्चिम एशियाई क्षेत्र में तकरीबन 60 लाख प्रवासी भारतीय रहते हैं। इन भारतीयों के द्वारा प्रतिवर्ष भारी मात्र में रेमिटांस भेजा जाता है।
- सबसे बढ़कर पश्चिम एशियाई क्षेत्र से भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करता है। यदि इस क्षेत्र में उथल - पुथल की स्थिति बनी रहती है तो भारत की उफर्जा सुरक्षा संकट में पड़ सकती है।
पश्चिम एशियाई देशों के साथ सशक्त सम्बंधों की स्थापना के लिए भारत के द्वारा उठाये जाने वाले कदमः
- भारत को पश्चिम एशियाई देशों के साथ अपने हितों को ध्यान में रखते हुए कदम उठाने चाहिए। उसे पश्चिम एशियाई देशों के व्यक्तिगत संम्बधों एवं विवादों में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।
- भारत दुनिया का एक ऐसा देश है जहाँ विभिन्न धर्मों के लोग आपसी सद्भाव से रहते हैं। भारत इस मॉडल को पश्चिम एशियाई देशों के मध्य प्रचारित कर सकता है क्योंकि पश्चिम एशियाई देश प्रमुखतः धार्मिक विभेदों के कारण संघर्षरत हैं।
- पश्चिम एशियाई देशों के साथ भारत को आपसी संवाद एवं कूटनीतिक सम्बंधों को लगातार मजबूती प्रदान करने के प्रयास जारी रखने चाहिए।
निष्कर्षः- निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि पश्चिम एशिया की वर्तमान स्थिति भारत के लिए चिंताजनक है। इस स्थिति से निपटने के लिए भारत को उपर्युक्त सुझावों पर अमल करते हुए पश्चिम एशियाई देशों के साथ सशक्त सम्बंध बनाने के लिए प्रयासरत रहना होगा।