एशियन आर्क ऑफ डेमोक्रेसी? से आप क्या समझते हैं, सविस्तार उल्लेख कीजिए?? एशियन आर्क ऑफ डेमोक्रेसी? के समक्ष उपस्थित प्रमुख चुनौतियों का उल्लेख कीजिए। साथ ही बताइए कि यह हिन्द-प्रशांत क्षेत्र के शक्ति संतुलन को किस प्रकार प्रभावित कर सकता है?

एशियन आर्क ऑफ डेमोक्रेसी’ से तात्पर्य चतुष्पक्षीय सुरक्षा वार्ता फोरम से है। इस चतुष्पक्षीय सुरक्षा वार्ता फोरम में भारत, जापान, अमेरिका एवं ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं। वस्तुतः इस चतुष्पक्षीय सुरक्षा वार्ता फोरम का गठन वर्ष 2007 में किया गया था किंतु वास्तविक स्वरूप धारण करने से पूर्व ही इसे समाप्त कर दिया गया। हाल ही में यह गठबंधन पुनः सामने आया है। इस बार चारों भागीदार इस चतुष्पक्षीय सुरक्षा वार्ता फोरम के प्रति काफी गम्भीर हैं।

उल्लेखनीय है कि इस एशियन आर्क ऑफ डेमोक्रेसी नामक चतुष्पक्षीय सुरक्षा वार्ता फोरम को पुनर्जीवित करने का निर्णय हाल ही में फिलीपींस में आयोजित 31वें आसियान शिखर सम्मेलन के दौरान लिया गया। इस सम्मेलन में भारत, जापान, अमेरिका एवं आस्ट्रेलिया ने मिलकर हिंद-प्रशांत क्षेत्र को स्वतंत्र बनाये रखने के लिए समग्र सुरक्षा सहयोग के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।

एशियन आर्क ऑफ डेमोक्रेसी के समक्ष उपस्थित प्रमुख चुनौतियाँ:-

  • वर्ष 2007 में भारत, जापान, आस्ट्रेलिया एवं अमेरिका नामक चार देशों ने मिलकर चतुष्पक्षीय सुरक्षा वार्ता संगठन ‘एशियन आर्क ऑफ डेमोक्रेसी’ का गठन किया था किंतु शीघ्र ही आस्ट्रेलिया इससे बाहर आ गया था। एक बार पुनः चारों देश एकत्रित हुए हैं किंतु संशय बरकरार है कि कहीं आस्ट्रेलिया पुनः बाहर होने का निर्णय न ले ले।
  • एशियन आर्क ऑफ डेमोक्रेसी एक सुरक्षा आधारित समूह है। ज्ञातव्य है कि सुरक्षा आधारित समूह सामूहिक एवं सार्वजनिक हितों के स्थान पर स्वयं के हितों को अधिक महत्व प्रदान करते हैं अतः ऐसे संगठनों में सर्वसहमति का बन पाना कठिन होता है।
  • एशियन आर्क ऑफ डेमोक्रेसी में शामिल आस्ट्रेलिया के उपर चीन का दबाव है। दरअसल ऑस्ट्रेलिया की अर्थव्यवस्था भारी मात्र में चीन के वस्तुगत निर्यात पर निर्भर है। इस कारण से भविष्य में आस्ट्रेलिया चीन के दबाव में अपना मत पुनः परिवर्तित कर सकता है।

एशियन आर्क ऑफ डेमोक्रेसी हिंद-प्रशांत के शक्ति संतुलन को किस प्रकार प्रभावित कर सकता है?

  • यदि चार देशों भारत, जापान, अमेरिका एवं आस्ट्रेलिया का गठबंधन कामयाब होता है तो इससे हिंद-प्रशांत क्षेत्र के शक्ति संतुलन पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा। ज्ञातव्य है कि चीन दक्षिण चीन सागर एवं पश्चिमी प्रशांत महासागर के अधिकांश हिस्से में अपना दावा प्रस्तुत कर रहा है।
  • यदि चीन अपने मंसूबे में कामयाब होता है तो दक्षिणी चीन सागर से होकर जाने वाले व्यापारिक एवं सामरिक पोतों की आवाजाही बाधित हो सकती है। ऐसी स्थिति में भारत, जापान,अमेरिका एवं आस्ट्रेलिया का साथ आना बहुत जरूरी है।
  • सबसे बढ़कर भारत की ‘एक्ट ईस्ट नीति’ के लिए यह जरूरी है कि चीन की विस्तारवादी प्रवृत्ति पर नियंत्रण स्थापित किया जाये। एशियन आर्क ऑफ डेमोक्रेसी में शामिल चार देश चीन की विस्तारवादी प्रवृत्ति पर समुचित नियंत्रण स्थापित कर हिंद-प्रशांत क्षेत्र की समग्र सुरक्षा को सुनिश्चित कर सकते हैं।

निष्कर्षः- निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि ‘एशियन आर्क ऑफ डेमोक्रेसी’ चार प्रमुख लोकतांत्रिक देशों का सुरक्षा संगठन है। यह सुरक्षा संगठन हिंद-प्रशांत क्षेत्र की समग्र सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए प्रतिब( है।

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