हाल ही में प्रधनमंत्री की अध्यक्षता में हुयी कैबिनेट की बैठक में राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग के गठन को स्वीकृति प्रदान की गयी है। राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (Medical council of India) का स्थान लेगा। राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग के गठन के पीछे प्रमुख उद्देश्य देश की चिकित्सा शिक्षा को अधिक पारदर्शी एवं गुणवत्तापूर्ण बनाना है। राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग के गठन से सम्बंधित विधेयक को भी सरकार ने अपनी स्वीकृति प्रदान कर दी है। इस विधेयक को शीतकालीन सत्र में ही प्रस्तुत किया जायेगा।
राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग की क्रियाविधि:-
- नवगठित राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग में 20 सदस्यों का प्रावधान किया गया है।
- राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग के अध्यक्ष एवं सदस्यों का चयन एक समिति के द्वारा किया जायेगा। इस समिति की अध्यक्षता कैबिनेट सचिव के द्वारा की जायेगी।
- राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग का मुख्य कार्य देश में चिकित्सा शिक्षा को अधिक गुणवत्तापूर्ण एवं पारदर्शी बनाना होगा।
- राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग से सम्बंधित विधेयक में यह भी प्रावधान किया गया है कि तय मानकों को पूरा करने वाले कॉलेज स्वयं ‘एमबीबीएस’ तथा पोस्ट ग्रेजुएट सीटें बढ़ा सकेंगे।
- सम्बंधित विधेयक में राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग के अंतर्गत चार स्वायत्त बोर्डों के गठन का भी प्रावधान किया गया है। ये चार स्वायत्त बोर्ड चिकित्सा शिक्षा के अलग-अलग क्षेत्रों की निगरानी का कार्य करेंगे।
मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के स्थान पर राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग के गठन के पीछे प्रमुख कारणः
- मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के स्थान पर राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग के गठन के पीछे सबसे प्रमुख कारण भ्रष्टाचार है।
- भ्रष्टाचार के कारण मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया न तो मेडिकल शिक्षा की स्थिति में सुधार ला पा रही थी और न ही योग्य चिकित्सकों को तैयार करने में सफल हो पा रही थी।
- एक नियामक संस्था के रूप में मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया पूरी तरह से अक्षम साबित हो रही थी। इस संस्था की साख उस समय काफी गिर गयी थी जब यह सामने आया कि यह संस्था पैसे के बल पर मेडिकल कॉलेजों को मान्यता प्रदान कर रही थी।
- उल्लेखनीय है कि मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष को ही घूसखोरी के आरोप में गिरफ्तार किया जा चुका है।
- इस प्रकार मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया न तो मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता को बनाये रखने में कामयाब हो पा रही थी और न ही मेडिकल पेशे की गरिमा को।
निष्कर्षः- निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के स्थान पर गठित किया जाने वाला राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग मेडिकल शिक्षा को अधिक पारदर्शी बनाने तथा गुणवत्तापूर्ण मेडिकल शिक्षा को उपलब्ध कराने के साथ-साथ मेडिकल पेशे की गरिमा को बनाये रखने में मददगार साबित होगा।