हाल ही में केन्द्र सरकार के द्वारा सांसदों एवं विधायकों के विरुद्ध लंबित आपराधिक मामलों के निस्तारण के लिए 12 विशेष अदालतों के गठन का निर्णय लिया गया है, स्पष्ट कीजिए। देश में जनप्रतिनिधियों से सम्बंधित आपराधिक मामलों की वर्तमान स्थिति क्या है? साथ ही बताइए कि विशेष अदालतों के गठन से राजनीति को अपराधमुक्त बनाने में किस प्रकार से मदद मिलेगी?

राजनीति को अपराध मुक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए हाल ही में केन्द्र सरकार के द्वारा 12 विशेष अदालतों के गठन का निर्णय लिया गया है। इन विशेष अदालतों के माध्यम से सांसदों एवं विधायकों के विरुद्ध लंबित आपराधिक मामलों का शीघ्रातिशीघ्र निस्तारण करने का प्रयास किया जायेगा, ये विशेष अदालतें एक वर्ष की अवधि के लिए गठित की जायेंगी।

ज्ञातव्य है कि केन्द्र सरकार के द्वारा विशेष अदालतों के गठन का निर्णय सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर लिया गया है। 1 नवम्बर 2017 को सर्वोच्च न्यायालय ने केन्द्र सरकार को निर्देश दिया था कि वह सांसदों एवं विधायकों से सम्बंधित आपराधिक  मामलों की जानकारी प्रस्तुत करें तथा बताये कि एक वर्ष के भीतर कितने मामलों का निस्तारण हुआ है। सर्वोच्च न्यायालय के इसी निर्देश के अनुसार 12 दिसम्बर 2017 को केन्द्रीय कानून मंत्रलय ने हलफनामा दाखिल कर जानकारी दी कि सरकार इस सम्बंध में एक वर्ष की अवधि् के लिए 12 विशेष अदालतों का गठन करेगी।

देश में जनप्रतिनिधियों से सम्बंधित आपराधिक  मामलों की वर्तमान स्थितिः-

  • वर्ष 2017 के आम चुनावों के दौरान दाखिल किये गये नामांकन से प्राप्त जानकारी के अनुसार, तकरीबन 1600 मामले सांसदों एवं विधायकों के विरुद्ध विभिन्न अदालतों में लंबित हैं।
  • 51 जनप्रतिनिधियों  ने अपने हलफनामें में स्वीकार किया है कि उनके विरुद्ध महिलाओं के खिलाफ किये गये अपराध से सम्बंधित मामले दर्ज हैं। इन 51 जनप्रतिनिधियों  में 3 सांसद एवं 48 विधायक हैं।
  • मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के द्वारा 334 ऐसे उम्मीदवारों को टिकट दिया गया था जिनके विरुद्ध महिलाओं के खिलाफ किये गये अपराधों से सम्बंधित मामले दर्ज थे।
  • महाराष्ट्र राज्य में आपराधिक  हानि वाले सर्वाधिक (12) सांसद एवं विधायक हैं। इस मामले में पश्चिम बंगाल द्वितीय एवं ओडिशा तृतीय स्थान पर हैं।

विशेष अदालतों के गठन से राजनीति को अपराधमुक्त बनाने में किस प्रकार से मदद प्राप्त होगी?

  • आपराधिक पृष्ठभूमि वाले जनप्रतिनिधियों के विरुद्ध वर्षों से चल रहे मामलों का शीघ्र निस्तारण हो सकेगा जिससे भविष्य में आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों को चुनाव लड़ने से प्रतिबंधित किया जा सकेगा।
  • केन्द्र सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय में स्वीकार किया है कि वह निर्वाचन आयोग एवं विधि आयोग की उन सिफारिशों पर विचार कर रही है जिनमें आपराधिक मामलों में दोषी पाये गये जनप्रतिनिधियों  पर आजीवन प्रतिबंध लगाने की बात कही गयी है।
  • चूँकि विशेष अदालतों का गठन एक वर्ष की अवधि के लिए ही किया गया है अतः इससे निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि एक वर्ष के भीतर जनप्रतिनिधियों  से सम्बंधित आपराधिक  मामलों का निस्तारण कर दिया जायेगा।

निष्कर्षः- निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि विशेष अदालतों के गठन का निर्णय बहुत महत्वपूर्ण एवं प्रभावी साबित होगा। इससे राजनीति को अपराधमुक्त बनाने के साथ-साथ राजनीति के अपराधीकरण को नियंत्रित करने में भी सहायता प्राप्त होगी।

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