जुडीशियल वेवर प्रणाली (Judicial waiver system) के के तहत किसी नाबालिग बच्चे (18 वर्ष से कम आयु) के द्वारा किये गये अपराध के सम्बंध में जुवेनाइल न्यायालय के स्थान पर बालिग लोगों के लिए निर्धारित न्यायालय में मामला चलाया जाता है तथा आरोपी नाबालिग को प्रदत्त छूट समाप्त कर दी जाती है।
अमेरिका, ब्रिटेन जैसे देशों में जुडीशियल वेवर प्रणाली का प्रयोग किया जाता है। वस्तुतः जुडीशियल वेवर प्रणाली का उद्देश्य उन नाबालिग बच्चों को कठोर सजा प्रदान करना है जो बालिगों के समान गंभीर अपराध को अंजाम देते हैं। ज्ञातव्य है कि वर्तमान समय के खान-पान एवं सूचना- प्रौद्योगिकी के इस युग में बच्चे 18 वर्ष से पहले ही परिपक्वता (Msturity) की अवस्था में पहुँच जाते हैं।
रेयान इण्टरनेशनल पब्लिक स्कूल के मामले में जुडीशियल वेवर प्रणाली का प्रयोगः
- हरियाणा राज्य के गुरूग्राम स्थित रेयान इण्टरनेशनल पब्लिक स्कूल में कुछ माह पूर्व प्रद्युम्न नामक बच्चे की नृशंस हत्या उसी स्कूल के 11वीं के एक छात्र ने कर दी थी। हत्यारोपी इस छात्र पर अब वयस्क आरोपी की तरह मामला चलाया जायेगा।
- ज्ञातव्य है कि हत्यारोपी छात्र के सम्बंध में जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने सामाजिक व मनोवैज्ञानिक रिपोर्ट तैयार की। इन रिपोर्टों के आधार पर पता चला कि हत्यारोपी छात्र स्वभाव से काफी आक्रामक था।
- सामाजिक जाँच रिपोर्ट के तहत हत्यारोपी छात्र के सम्बंध में उसके शिक्षकों, मित्रों, रिश्तेदारों तथा स्कूल के कर्मचारियों से जानकारी प्राप्त की गयी। इससे हत्यारोपी छात्र के स्वभाव की जानकारी प्राप्त हुयी। यह रिपोर्ट ही जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के फैसले का प्रमुख आधार बनी।
- इस मामले में हत्यारोपी नाबालिग को ठीक उसी प्रकार सजा दिलाने का प्रावधान किया गया है जैसा कि विकसित देशों में जुडीशियल वेवर प्रणाली के तहत किया जाता है। इससे भारत में भी जुडीशियल वेवर प्रणाली को लागू करने की बहस तीव्र हो रही है।
भारत में जुडीशियल वेवर जैसी प्रणाली को शुरुआत के मायनेः
- यद्यपि भारत में आधिकारिक तौर पर जुडीशियल वेवर की शुरुआत नहीं हुयी है किंतु इस दिशा में की गयी हालिया पहलें (Initiatives) यह साबित करती हैं कि भारतीय समाज एवं कानून जुडीशियल वेवर के पक्ष में हैं।
- रेयान इण्टरनेशनल पब्लिक स्कूल से पहले भी नाबालिग अपराधियों पर वयस्क अपराधियों की तरह मामला चलाये जाने का निर्णय लिया जा चुका है। मार्च 2017 में मध्य प्रदेश के झाबुआ जिले की अदालत के द्वारा 16 एवं 17 वर्ष के हत्यारोपियों को आजीवन कारावास और 10-10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई जा चुकी है।
- उल्लेखनीय है कि भारत में दिसम्बर 2012 में निर्भया कांड के बाद सबसे पहले नाबालिग अपराधियों पर बालिग अपराधियों की तरह मामला चलाये जाने की माँग ने जोर पकड़ा था। निर्भया कांड में शामिल एक नाबालिग अपराधी ने बड़ी क्रूरता का परिचय दिया था किंतु नाबालिग होने के कारण उसे मात्र तीन वर्ष के लिए सुधार गृह में भेजने की सजा ही दी गयी थी।
निष्कर्षः- निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि जुडीशियल वेवर के तहत जघन्यतम अपराधें में लिप्त नाबालिग बच्चों के साथ वयस्क अपराधियों की भाँति व्यवहार किया जाता है। हालिया घटनायें साबित करती हैं कि भारतीय समाज एवं कानून जुडीशियल वेवर को लागू करने के पक्ष में हैं।