मुक्त प्रतिष्पर्धा एवं वैश्वीकरण के इस दौर में प्रत्येक विनिर्माता अधिकतम लाभ अर्जित करना चाहता है। इस लाभ के लिए वह अनुचित एवं भ्रामक विज्ञापनों का सहारा लेकर आक्रामक प्रचार का तरीका अपनाता है। इस कारण से यह बहुत जरूरी हो जाता है कि उपभोक्ता जिस वस्तु को खरीद रहा हो उसकी समुचित जानकारी उसे हो अन्यथा वह ठगी का शिकार हो सकता है।
भारत में उपभोक्ता संरक्षण आंदोलन वर्ष 1986 में शुरू हुआ। इसी वर्ष उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 1986 पारित किया गया। उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 1986 की धारा 6 के अंतर्गत उपभोक्ताओं के हितों के समुचित संरक्षण के लिए 6 मौलिक अधिकार प्रदान किये गये हैं।
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत उपभोक्ताओं को प्रदान किये गये मौलिक अधिकारः
- उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत उपभोक्ताओं को जो 6 मौलिक अधिकार प्रदान किये गये हैं उनमें सुरक्षा का अधिकार, सूचना का अधिकार, चयन का अधिकार, सुनवाई का अधिकार, शिक्षा का अधिकार एवं हर्जाने का अधिकार शामिल हैं ।
- सुरक्षा के अधिकार के तहत उपभोक्ताओं को यह अधिकार दिया गया है कि यदि कोई सेवा एवं वस्तु उनके जीवन एवं सम्पत्ति के लिए हानिकारक है तो उपभोक्ताओं को जानकारी दी जानी चाहिए।
- सूचना के अधिकार के तहत उपभोक्ताओं को यह अधिकार दिया गया है कि उन्हें सेवाओं एवं वस्तुओं की मात्र, गुणवत्ता, प्रभाव, कीमत एवं शु(ता आदि के बारे में जानने का पूरा अधिकार होगा।
- उपभोक्ताओं को चयन का अधिकार प्रदान किया गया है। इसके तहत उपभोक्ता प्रतिस्पर्धी कीमतों पर विभिन्न प्रकार की सेवायें एवं वस्तुएं प्राप्त कर सकते हैं।
- सुनवाई के अधिकार के तहत उपभोक्ताओं को यह अधिकार दिया गया है कि यदि उनके साथ कुछ गलत होता है तो उचित उपभोक्ता मंच पर उनके हितों का ध्यान रखा जायेगा।
- शिक्षा के अधिकार के तहत उपभोक्ताओं को बाजार में चल रहे तौर तरीकों की एवं उनसे बचने की जानकारी दी जाती है।
- हर्जाने के अधिकार के तहत यदि उपभोक्ता के साथ अनुचित व्यवहार किया जाता है और यह अनुचित व्यवहार साबित हो जाता है तो उपभोक्ताओं को भरपाई की जायेगी।
उपभोक्ताओं के हितों के संरक्षण के लिए सरकार के द्वारा उपलब्ध कराये गये ऑनलाइन माध्यमः
- उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए सरकार के द्वारा इनग्राम नामक पोर्टल स्थापित किया गया है। यह पोर्टल उपभोक्ताओं, केन्द्र सरकार तथा राज्य सरकारों को एवं अन्य सम्बंधित पक्षों को एक ही मंच पर लाता है और एकीकृत शिकायत निवारण व्यवस्था स्थापित करता है।
- इसी प्रकार अनुचित एवं भ्रामक विज्ञापनों से उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए सरकार के द्वारा ‘गामा’ (GAMA-Grievances Against Misleading advertisements) नामक पोर्टल की शुरूआत की गयी है।
- सरकार के द्वारा एक स्मार्ट कन्ज्यूमर एप लाँच किया गया है। इसके तहत उपभोक्ता उत्पाद का बार कोड स्कैन कर सकेंगे और उसका सारा विवरण प्राप्त कर सकेंगे। जरूरत पड़ने पर इस जानकारी के आधार पर शिकायत भी दर्ज करायी जा सकेगी।
- सबसे बढ़कर बेंगलुरू के नेशनल लाँ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी में भारत सरकार के उपभोक्ता मामलों के अधीन एक मध्यस्तथा केन्द्र स्थापित किया गया है। इसका उद्देश्य भौतिक तथा ऑनलाइन माध्यम से मध्यस्तथा के जरिए विवादों का निपटारा करना है।
निष्कर्षः निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि मुक्त प्रतिस्पर्धा एवं वैश्वीकरण के इस युग में उपभोक्ताओं का संरक्षण अनिवार्य है। उपभोक्ताओं के संरक्षण के लिए सरकार के द्वारा कई ऑनलाइन माध्यम उपलब्ध कराये गये हैं। साथ ही निःशुल्क हेल्पलाइन की भी व्यवस्था की गयी है।