भारत एवं ईरान सम्बंधों पर प्रकाश डालते हुए बताइए कि ईरान का भारत के लिए क्या महत्त्व है? भारत एवं ईरान के मध्य हस्ताक्षरित नई दिल्ली घोषणा के प्रमुख उद्देश्य क्या थे? इन उद्देश्यों की प्राप्ति में भारत अभी तक कितना सफल रहा है?

भारत एवं ईरान के मध्य सम्बंध सौहार्दपूर्ण रहें हैं। सबसे बढ़कर 21वीं सदी में दोनों देशों के बीच सम्बंधों को नयी मजबूती प्राप्त हुयी है। भारत के लिए ईरान का रणनीतिक महत्त्व होने के साथ-साथ आर्थिक महत्त्व भी है।

ईरान के माध्यम से भारत न सिर्फ यूरोप में प्रवेश कर सकता है बल्कि वह अफगानिस्तान में भी सुरक्षित एवं आसान पहुँच बना सकता है। भारत के द्वारा ईरान में चाबहार बंदरगाह का विकास किया जा रहा है जिसे अफगानिस्तान के जरांज डेलाराम राजमार्ग से जोड़ने के लिए तीनों देश एक साथ काम कर रहे हैं।

सबसे बढ़कर भारत की उफर्जा सम्बंधी जरूरतों को पूरा करने में भी ईरान का महत्त्वपूर्ण स्थान है।

भारत एवं ईरान के मध्य  पूर्व में हस्ताक्षरित नई दिल्ली घोषणाः

  • जनवरी 2003 में तत्कालीन भारतीय प्रधनमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी एवं ईरान के तत्कालीन राष्ट्रपति मोहम्मद खातमी (हसन रूहानी) के बीच एक संधि हुयी थी जिसे नई दिल्ली घोषणा के नाम से जाना जाता है।
  • नई दिल्ली घोषणा के अंतर्गत दोनों देशों के द्वारा आतंकवाद के विरुद्ध आपसी सहयोग बढ़ाने का वादा किया गया।
  • विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में शैक्षिक सहयोग एवं अवसरों की वृद्धि के लिए दोनों देश मिलकर कार्य करेंगे।
  • उफर्जा सम्बंधी व्यापार को बढ़ावा देने के साथ-साथ यूरेशियाई बाजार तक पहुँच स्थापित करने में दोनों देश एक-दूसरे की सहायता करेंगे।
  • दोनों देशों के द्वारा क्षेत्रीय विकास एवं क्षेत्रीय सुरक्षा को सुनिश्चित करने के प्रति प्रतिबद्धता व्यक्त की गयी।

नई दिल्ली घोषणा के तहत निर्धारित उद्देश्यों  की प्राप्ति में भारत कहाँ तक सफल रहा है?

  • कनेक्टिवटी स्थापित करने के मामले में काफी विलंब हुआ है जिसका प्रमुख कारण ईरान पर आरोपित किये गये प्रतिबंध थे। किंतु 2015 के बाद जब ईरान के उपर से प्रतिबंध हटे तो भारत एवं ईरान दोनों काफी अधिक सक्रिय हुए हैं। चाबहार बंदरगाह का विकास जारी है तथा इसको अफगानिस्तान के जरांज डेलाराम राजमार्ग से जोड़ने का कार्य चल रहा है।
  • हाल ही में भारत के द्वारा अफगानिस्तान को चाबहार के माध्यम से गेहूँ की पहली खेप भेजी गयी है। इससे स्पष्ट होता है कि भारत एवं ईरान कनेक्टिवटी को लेकर काफी अधिक सक्रिय दिखायी दे रहे हैं।
  • हालाँकि आतंकवाद के मुद्दे पर अधिक प्रगति देखने को नहीं मिली है। इस्लामिक रूढ़िवादी समूह अभी भी मध्य पूर्वी भाग में सक्रिय हैं। आतंकवादियों को सबसे बड़ा समर्थन इन्हीं इस्लामिक समूहों से प्राप्त होता है।
निष्कर्षः- निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि भारत एवं ईरान के मध्य सम्बंध सौहार्दपूर्ण रहे हैं। अमेरिका के द्वारा आरोपित प्रतिबंधों से भारत - ईरान सम्बंधों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है किंतु फिलहाल संबंध सामान्य स्थिति में हैं। दोनों देश दिल्ली घोषणा के तहत निर्धारित उद्देश्यों की प्राप्ति में संलग्न हैं।
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