सार्वभौमिक स्वास्थ्य के मुद्दे पर सम्पन्न अल्मा आटा घोषणा के बारे में आप क्या जानते हैं, सविस्तार स्पष्ट कीजिए? अल्मा आटा घोषणा के तहत निर्धारित सिद्धान्त भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र को बेहतर बनाने के लिए किस प्रकार से महत्त्वपूर्ण हैं?

सार्वभौमिक स्वास्थ्य के सम्बंध में आधारभूत सिद्धांतों को तय करने के लिए वर्ष 1978 अल्मा आटा घोषणा को अपनाया गया जिसमें स्वास्थ्य को मानव जीवन का सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण तत्व माना गया है। यही कारण है राज्य से उम्मीद की जाती है कि वह सभी के लिए वहनीय स्वास्थ्य सुविधायें उपलब्ध कराने का प्रयास करे। अल्मा आटा घोषणा के तहत निर्धारित सिद्धान्त न सिर्फ भारत के लिए बल्कि अन्य देशों के लिए भी मार्गदर्शक की भूमिका अदा करते हैं।

अल्मा आटा घोषणा के तहत निर्धारित प्रमुख सिद्धान्त :

  • अल्मा आटा घोषणा में प्राथमिक स्तर पर बेहतर स्वास्थ्य प्रणाली की स्थापना की बात कही गयी है ताकि लोगों को शुरूआत में ही बेहतर स्वास्थ्य सुविधायें प्राप्त हो सकें।
  • इस घोषणा में यह भी स्पष्ट किया गया है कि द्वितीयक एवं तृतीयक स्तर पर भी उसी प्रकार की मजबूत व्यवस्था होती चाहिए जैसी कि प्राथमिक स्तर पर है।
  • प्राथमिक स्तर पर कुशल स्वास्थ्य कर्मियों की नियुक्ति कर एवं सभी प्रकार की आधारभूत जरूरतों को पूरा कर स्थानीय स्वास्थ्य देखभाल हब का निर्माण किया जाना चाहिए।
  • स्वास्थ्य देखभाल के सभी स्तरों पर मसलन प्राथमिक, द्वितीयक एवं तृतीयक स्तर पर सुरक्षित एवं कम कीमत पर स्वास्थ्य तकनीकी को उपलब्ध कराया जाना चाहिए।
  • वहनीय स्वास्थ्य सुविधाओं तक सभी नागरिकों की पहुँच स्थापित की जानी चाहिए।
  • प्राथमिक स्तर पर मौजूद स्वास्थ्य कर्मियों को कौशल प्रदान कर उनकी भूमिका में वृद्धि करना।
  • सबसे बढ़कर स्वास्थ्य सुविधाओं का समुचित विकेन्द्रीकरण करके सभी को सार्वभौमिक स्वास्थ्य सुविधायें प्रदान करना अल्मा आटा घोषणा के प्रमुख लक्ष्यों में से एक है।

अल्मा आटा घोषणा के तहत निर्धारित सिद्धान्त भारत के लिए किस प्रकार से महत्तवपूर्ण हैं?

  • भारत में प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों की स्थिति बेहतर नहीं है। प्राथमिक स्तर पर आधारभूत सुविधाओं एवं कुशल स्वास्थ्य कर्मियों दोनों की कमी है। अल्मा आटा घोषणा के तहत निर्धारित सिद्धांतों को लागू कर भारत अपनी प्राथमिक स्वास्थ्य प्रणाली को सशक्त बना सकता है।
  • भारत में गरीबों की संख्या काफी अधिक है जिसके कारण स्वास्थ्य सम्बंधी परेशानी उत्पन्न होने पर लोगों के पास व्यय के लिए अधिक वित्तीय संसाधन नहीं होते। इस सम्बंध में अल्मा आटा घोषणा भारत के लिए मार्गदर्शक का कार्य कर सकती है। ज्ञातव्य है कि अल्मा आटा घोषणा में कहा गया है कि राज्य के द्वारा सभी को वहनीय कीमत पर सार्वभौमिक स्वास्थ्य की सुविध उपलब्ध करायी जानी चाहिए।
  • स्वास्थ्य कर्मियों को समुचित प्रशिक्षण एवं कौशल प्रदान कर उन्हें जनता के प्रति अधिक उत्तरदायी बनाया जा सकता है। अल्मा आटा घोषणा में यह तथ्य उल्लिखित है।

निष्कर्षः- निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि अल्मा आटा घोषणा प्राथमिक स्वास्थ्य से सम्बंधित है। इसके तहत निर्धारित सिद्धांत भारत के लिए काफी महत्त्वपूर्ण हैं क्योंकि भारत में प्राथमिक स्वास्थ्य की दशा निम्न स्तरीय है।

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