मध्य एशियाई एवं यूरेशियाई क्षेत्र के प्रति भारत सरकार की नीति क्या रही है? यह क्षेत्र भारत के लिए किस प्रकार महत्वपूर्ण है? साथ ही बताइए कि मध्य एशिया में आसान पहुँच स्थापित करने के भारत के प्रयास किस सीमा तक सफल रहे हैं?

     मध्य एशियाई एवं यूरेशियाई देशों के साथ यद्यपि भारत के सम्बंध काफी मजबूत रहे हैं, किंतु भारत इस क्षेत्र की ओर उस प्रकार नहीं ध्यान दे पाया है जैसा कि उसने यूरोपीय एवं दक्षिण पूर्वी एशियाई देशों के प्रति दिया है। वर्तमान सरकार मध्य एशियाई तथा यूरेशियाई देशों की ओर गंभीरता पूर्वक ध्यान दे रही है। रणनीतिक विशेषज्ञ इसे ‘एक्ट नार्थ’ की नीति के नाम से सम्बोधित कर रहे हैं।

            मध्य एशियाई देशों एवं यूरेशियाई देशों तक पहुंचने के लिए भारत के पास कोई सीधा मार्ग नहीं है क्योंकि पाक अधिकृत कश्मीर पर पाकिस्तान का कब्जा है। इस क्षेत्र में सीधी पहुंच न होने के कारण भारत को अन्य वैकल्पिक रास्तों की तलाश करनी पड़ रही है। यही कारण है कि भारत ईरान एवं अफगानिस्तान के माध्यम से मध्य एशियाई एवं यूरेशियाई क्षेत्र में पहुंच स्थापित करने के लिए प्रयासरत है।

मध्य एशिया एवं यूरेशियाई क्षेत्र भारत के लिए किस प्रकार से महत्वपूर्ण है?

  • मध्य एशिया एवं यूरेशिया का क्षेत्र भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के सम्बंध में अहम भूमिका अदा कर सकता है। ज्ञातव्य है कि यह क्षेत्र तेल एवं गैस के साथ-साथ परमाणु ऊर्जा के लिए आवश्यक सामग्री यूरेनियम के मामले में भी समृद्ध है।
  • मध्य एशिया एवं यूरेशिया एक बड़े भूभाग को कवर करता है। इस क्षेत्र में भारतीय उत्पादों के लिए एक बड़ा बाजार मौजूद है। इस प्रकार इस क्षेत्र में भारत के लिए आर्थिक अवसर भी उपलब्ध हैं।
  • इस क्षेत्र के देशों का समर्थन भारत की सॉफ्ट डिप्लोमेसी (Soft Diplomacy) के लिए अनिवार्य है। सॉफ्ट डिप्लोमेसी से तात्पर्य संयुक्त राष्ट्र संघ में किसी मुद्दे पर अधिकाधिक देशों का समर्थन प्राप्त करने से है।
  • सबसे बढ़कर भारत इस क्षेत्र में अपनी पहुंच बढ़ाकर प्राचीन सिल्क रूट का पुनर्विकास कर सकता है जिससे व्यापारिक संभावनाओं को गति प्राप्त होगी। ज्ञातव्य है कि प्राचीन काल में भारत के उत्तर-पश्चिमी हिस्से से होकर मध्य एशियाई क्षेत्र को जोड़ता हुआ रेशम मार्ग गुजरता था।

मध्य एशिया में आसान पहुंच स्थापित करने के लिए भारत के प्रयास किस सीमा तक सफल रहे हैं?

  • भारत के द्वारा मध्य एशियाई क्षेत्र में आसान पहुंच स्थापित करने के लिए अफगानिस्तान में बेहतर आधारभूत संरचना का निर्माण किया जा रहा है किंतु अफगानिस्तान के साथ समस्या यह है कि वह एक युद्धग्रस्त राष्ट्र है, अतः भारत अपने उद्देश्य में पूर्णत सफल नहीं हो पा रहा है।
  • इसी प्रकार के प्रयास भारत ईरान में भी कर रहा है। भारत ईरान में चाबहार बंदरगाह का विकास कर रहा है। चाबहार बंदरगाह का विकास न सिर्फ भारत एवं ईरान को आपस में जोड़ रहा है बल्कि उत्तर-दक्षिण कॉरिडोर के विकास में भी दोनों मिलकर प्रयास कर रहे हैं। यह प्रयास भी अभी पूरा नहीं हुआ है।
  • तापी पाइपलाइन का विकास अभी भी अधूरा है जबकि इसकी नींव काफी वर्ष पहले रखी जा चुकी है।

निष्कर्षः- निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि मध्य एशिया एवं यूरेशिया का क्षेत्र भारत के लिए कई दृष्टिकोण से अहम स्थान रखता है। इस क्षेत्र में पहुंच स्थापित करने के लिए भारत के प्रयासों को आंशिक सफलता ही मिली है।

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