54 घीसू और माधव प्रेमचन्द की अन्तिम कहानी ‘कफन’ के पात्र हैं।
55 आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी को ‘नवचेतना का संवाहक’ कहा जाता है। (आचार्य की पदवीं 1931 में काशी नागरी प्राचरिणी सभा ने दिया)।
56 प्रसाद पर शैवागम द्वैतवाद का, ‘पन्त’ पर गाँधी, माक्र्स और अरविन्द पणीत अतःश्चेतनावाद का, ‘निराला’ पर नववेदान्त/नवमानवतावाद का तथा महादेवी पर दुःखवाद (बौद्ध दर्शन) का प्रभाव है।
57 ‘दिनकर’ छायावादोत्तर काल के सर्वश्रेष्ठ कवि माने जाते हैं। उनकी अन्तिम काव्य कृति ‘हारे को हरिनाम’ है।
58 ‘अब लौ नसानी, अब न नसैहौं’ तुलसीदास
59 पन्त के खण्डकाव्य ‘मुक्ति यज्ञ’ के नायक महात्मा गाँधी हैं। (मुक्तियज्ञ ‘लोकायतन’ का अंश मात्र है)
60 हिन्दी काव्य में प्रयुक्त ‘बारहमासा’ का सर्वप्रथम वर्णन ‘बीसलदेर्व रासो’ (श्रृंगारी काव्य) में मिलता है।
61 आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने ‘भक्ति को धर्म का रसात्मक रूप कहा है।
62 खड़ी बोली हिन्दी के प्रथम कवि श्रीधर पाठक एकान्तवासी योगी (अनुदित)
63 आचार्य शुक्ल ने तुलसीदास को ‘लोकमंगल’ का तथा सूरदास को ‘जीवनोत्सव का कवि’ कहा है।
64 अमृतलाल नागर के उपन्यास ‘मानस का हंस’ तथा ‘खंजन नयन’ में तुलसीदास और सूरदास की औपन्यासिक जीवन है।
65 ‘झूठा सच’ (यशपाल) भारत विभाजन की पृष्ठभूमि में दो खण्डों में लिखा गया उपन्यास है।