96 महादेवी वर्मा का प्रथम प्रकाशित काव्य संग्रह ‘नीहार’ तथा अन्तिम ‘दीपशिखा’ है।
97 ‘रीतिकाल’ नाम का उल्लेख आचार्य शुक्ल से पूर्व डाॅ0 ग्रियर्सन ने किया था।
98 तुलसीदास ने भ्रमरगीत परम्परा के अन्तर्गत भ्रमरगीत की रचना की जो कृष्ण गीतावली में संकलित है।
99 ‘झारखण्डी’, ‘कलाधर’ प्रसाद के साहित्यिक उपनाम हैं।
100 ‘अपहूदरी’ (2015) रमणिका गुप्ता की आत्मकथा है। (सम्प्रति-सम्पादक: युद्धरत आम आदमी)
101 भरतेन्दु युग में खड़ी बोली हिन्दी काव्य की प्रमुख भाषा थी।
102 व्यास सम्मान पाने वाली प्रथम महिला कथाकार चित्रा मुद्गल हैं। कृतिः आवां (उपन्यास) के लिए 2003
103 कुँवर नारायण का नवीनतम काव्य संग्रह ‘कुमारजीव’ (2015) है।
104 इतिवृत्तात्मकता द्विवेदी युग की प्रमुख प्रवृति है।
105 राजनीतिक दर्शन के क्षेत्र में जो माक्र्सवाद है वही साहित्येतिहास के काल क्षेत्र में प्रगतिवाद है।
106 कविता के नये प्रतिमान नामवर सिंह तथा ‘नयी कविता के प्रतिमान’ लक्ष्मीकान्त वर्मा की कृतियाँ हैं।
107 डाॅ0 नामवर सिंह ने अपने गुरु आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी को ‘आकाशधर्मा गुरु’ कहा है।
108 ‘घर का जोगी जोगड़ा’ (संस्मरण) काशीनाथ सिंह की रचना है।
109 महात्मा गाँधी अन्तर्राष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय, वर्धा द्वारा प्रकाशित प्रमुख पत्रिकायें हैं-बहुवचन (साहित्य विमर्श केन्द्रित) तथा ताना-बाना (कला-संगीत व संस्कृति केन्द्रित)
110 डाॅ0 नामवर सिंह ने बाबा नागार्जुन को ‘आधुनिक कबीर’ कहा है।