हाल के विधानसभा चुनावों में विपक्षी दलों के द्वारा इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों की विश्वसनीयता पर प्रश्न उठाया गया है। उनका मानना है कि इस मशीनों को असानी से हैक किया जा सकता है तथा डाले गये मतों को एक विशेष दल के उम्मीदवारों के खाते में हंस्तातरित किया जा सकता है। इन आरोपों के कारण इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों के सम्बंध में एक नयी बहस की शुरूआत हुयी है।
उल्लेखनीय है कि इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों के विरुद्ध जो आरोप लगाये जा रहे हैं उनके पीछे तर्क से ज्यादा भावनाओं की भूमिका अधिक है। भारतीय निर्वाचन आयोग की चुनौती को कोई भी दल गलत नहीं साबित कर सका है। भारत में सर्वप्रथम वर्ष 1982 में केरल में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन का प्रयोग किया गया। आगे वर्ष 1999 के चुनाव में आंशिक तौर पर तथा वर्ष 2004 के चुनाव से व्यापक रूप से इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन का प्रयोग किया गया।
इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों के स्थान पर बैलट पेपर से चुनाव कराने के प्रभावः
- यद्यपि बैलेट पेपर को हैक नहीं किया जा सकता है किंतु बैलेट पेपर से चुनाव आयोजित कराने पर वोटों की गिनती तथा चुनाव परिणाम घोषित करने में काफी लम्बा समय लगेगा।
- बैलेट पेपर के माध्यम से डाला गया मत नष्ट हो सकता है क्योंकि कागज का क्षय सम्भव है। किंतु इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन में डाले गये मत के नष्ट होने की संभावना काफी कम है।
- बैलेट पेपर से चुनावों के आयोजन में काफी अधिक धन व्यय होता है जबकि इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों के माध्यम से चुनावों के आयोजन में काफी कम खर्च आता है।
- बैलेट पेपर के माध्यम से चुनावों के आयोजन में भ्रष्टाचार की संभावना बनी रहती है। भ्रष्ट अधिकारी कुछ गलत मत मत-पेटी में डाल सकते हैं।
- सबसे बढ़कर बैलेट पेपर से चुनावों के आयोजन से पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचता है। ज्ञातव्य है कि बैलेट पेपर के निर्माण के लिए भारी मात्र में कागज का प्रयोग करना पड़ता है।
इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों के प्रमुख लाभः
- इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों के प्रयोग से चुनाव में अधिक दक्षता लाने में मदद मिलेगी तथा इससे बहुत कम समय में ही चुनाव परिणाम घोषित किये जा सकते हैं।
- ईवीएम के प्रयोग से सरकार के व्यय में भी काफी कमी लायी जा सकती है। इससे राजकोषीय घाटा कम होगा।
- इन मशीनों को इस प्रकार से डिजाइन किया गया है कि बूथ कैप्चरिंग काफी कठिन होगा।
- चूँकि इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों के द्वारा एक मिनट में पाँच मत ही डाले जा सकते हैं अतः गैरकानूनी गतिविधियों को नियंत्रित करने अर्थात् अवैध मत डालने आदि जैसी समस्याओं को कम करने में मदद मिल सकती है।
निष्कर्षः- निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों के स्थान पर बैलेट पेपर से पुनः चुनावों को आयोजित कराना सही कदम नहीं होगा बल्कि इसके स्थान पर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों की समुचित सुरक्षा तथा वीवीपीएटी का प्रयोग जैसे कदम उठाने होंगे ताकि इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों की शुचिता में उठाये जाने वाले प्रश्नों पर नियंत्रण लगाया जा सके।