हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय के द्वारा दिए गये उस निर्णय का सविस्तार उल्लेख कीजिए जिसके तहत महिलाओं को यह अधिकार प्रदान किया गया कि यदि वे अपने समुदाय या धर्म से अलग किसी अन्य समुदाय या धर्म में विवाह करती हैं तो उन्हें अपनी धार्मिक पहचान बनाये रखने का अधिकार होगा। सर्वोच्च न्यायालय के इस निर्णय से महिला अधिकारों पर क्या प्रभाव होगा?

हाल ही में एक पारसी महिला के द्वारा सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर कर यह माँग की गयी थी उसे अपने धर्म के आचरण का अधिकार प्रदान किया जाये। ज्ञातव्य है कि इस महिला ने अपने धर्म से अलग दूसरे धर्म के व्यक्ति से विवाह किया था। समाज में प्रचलित मान्यता के अनुसार एक महिला के धर्मविवाह के बाद उसके पति के धर्म में विलय हो जाता है। कहने का तात्पर्य यह है कि विवाह के पश्चात् पत्नी को अपने पति के धर्म का पालन करना पड़ता है।

सर्वोच्च न्यायालय ने इस मान्यता को खारिज कर दिया है तथा महिलाओं के धार्मिक अधिकार के आचरण को स्वीकृति प्रदान की है। इस निर्णय का प्रभाव यह होगा कि महिला को विवाह के बाद भी अपने धर्म के पालन की स्वतंत्रता होगी भले ही उसने किसी दूसरे धर्म या समुदाय के व्यक्ति से विवाह किया हो।

सर्वोच्च न्यायालय के इस निर्णय से महिला अधिकारों पर क्या प्रभाव पड़ेगा?  

  • सर्वोच्च न्यायालय के इस निर्णय से पितृसत्तात्मक व्यवस्था पर गंभीर प्रहार हुआ है। ज्ञातव्य है कि पितृसत्तात्मक व्यवस्था के तहत महिलाओं को पुरूषों के अधीन माना जाता है तथा पत्नी को उसी धर्म के पालन के लिए विवश किया जाता है जो उसके पति का होता है।
  • इस निर्णय से महिलाओं के मौलिक अधिकार को समाज में प्रचलित मान्यताओं से ऊपर माना गया है।
  • इससे महिलाओं के सामाजिक सशक्तिकरण को बल मिलेगा। जिससे समाज में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने तथा अन्य क्षेत्रों में उनके आगे बढ़ने का मार्ग प्रशस्त होगा।
  • इस निर्णय से स्पष्ट हो गया है कि धर्म की स्वतंत्रता एवं आचरण एक निजी मामला है तथा किसी सामाजिक रूढ़ि या परम्परा के आधार पर इस अधिकार का हनन नहीं किया जा सकता है।
  • इससे समानता, स्वतंत्रता एवं स्वायत्तता के साथ-साथ सामाजिक न्याय में वृद्धि होगी जिससे और अधिक महिलायें अपने कानूनी एवं संवैधानिक  अधिकारों की प्राप्ति के लिए आगे आयेंगी।
  • इस निर्णय से महिलाओं को धार्मिक क्षेत्र में समानता प्राप्त होगी तथा यदि एक बार उन्हें धार्मिक क्षेत्र में समानता का अधिकार मिल जाता है तो आगे सामाजिक आर्थिक क्षेत्र में भी उन्हें समानता का अधिकार प्राप्त होने की संभावना बढ़़ जायेगी।
  • इस निर्णय से अंतर्जातीय एवं अंतधार्मिक विवाहों का मार्ग प्रशस्त होगा जिससे सामाजिक समानता में वृद्धि होगी।
  • सबसे बढ़कर इससे धर्म परिवर्तन जैसी समस्या को भी नियंत्रित करने में मदद मिलेगी। ज्ञातव्य है कि विवाह के लिए अक्सर धर्म परिवर्तन का सहारा अंतधार्मिक लिया जाता है।

निष्कर्षतः- निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि सर्वोच्च न्यायालय का यह निर्णय महिलाओं के मूल अधिकारों के संरक्षण में मील का पत्थर साबित होगा। सबसे बढ़कर इससे महिलाओं का सामाजिक सशक्तिकरण होगा।

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