वैश्विक स्तर पर शरणार्थियों की समस्या गंभीर स्वरूप धरण करती जा रही है। संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायोग के विषय में आप क्या जानते हैं? शरणार्थियों की समस्याओं के निराकरण में इस आयोग की भूमिका बताइए। साथ ही बताइए कि संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायोग के समक्ष कौन-सी प्रमुख बाधाएं हैं?

1950 में संयुक्त राष्ट्र महासभा के द्वारा संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायोग (United Nations High Commissioner for Refugees) का गठन किया गया। इसका मुख्यालय स्विट्जरलैण्ड के जेनेवा में है। संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायोग के द्वारा वैश्विक स्तर पर विस्थापित  लोगों की समस्या का समाधान करना है। उल्लेखनीय है कि द्वितीय विश्व युद्ध के पश्चात् काफी बड़ी संख्या में लोग विस्थापित हुए थे।

संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायोग के द्वारा शरणार्थी समस्या को हल करने के लिये उठाए गए कदम

  • अधिकांश शरणार्थी संकट से संबंधित मामलों में संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायोग ने या तो शरणार्थियों को सुरक्षित उनके देश पहुंचाने का काम किया है या अन्य देशों में अस्थायी शरण उपलब्ध कराई है।
  • संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायोग के द्वारा सुरक्षा का एजेंडा निर्धारित किया गया है जिसने शरणार्थियों की सुरक्षा के लिये सरकारों एवं मानवतावादी संगठनों को प्रेरित एवं प्रोत्साहित किया है।
  • संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायोग ने शरणार्थियों के पुनर्वास के पश्चात् वैश्विक स्तर पर शरणार्थियों के लिये स्कूल, अस्पताल एवं आश्रमगृहों का निर्माण किया है।
  • जो शरणार्थी  अपने देश वापस नहीं लौट सके हैं संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायोग ने न सिर्फ इन शरणार्थियों का पुनर्वास किया है बल्कि स्थानीय जनता के साथ इनका एकीकरण भी किया है।
  • सर्वाधिक सुभेद्य (Vulnerable) लोगों को संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायोग के द्वारा नकद वित्तीय सहायता भी उपलब्ध कराई गई है।
  • शरणार्थियों को समुचित सहायता उपलब्ध हो सके, इसके लिये इस आयोग ने सरकारों एवं गैर-सरकारी संगठनों के साथ मिलकर काम किया है।
  • संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायोग के द्वारा लेागों के काम के अधिकार की बात उठाई गई है तथा कौशल विकास को प्रोत्साहित करने का प्रयास किया गया है।
  • मध्य अफ्रीकी गणराज्यों, इसके युद्ध, दक्षिणी सूडान, सीरिया एवं यूरोप के शरणार्थी संकट के संबंध में इस आयोग की प्रभावी भूमिका रही है।
  • शरणार्थी समस्या के साथ-साथ इस आयोग ने आपदाओं के समय भी महत्वपूर्ण सहायता उपलब्ध कराई है। उदाहरण के तौर पर वर्ष 2004 में हिंद महासागर की सुनामी, 2005 के पाकिस्तान तथा 2008 के चीन के भूकंप एवं 2013 के फिलीपीन्स के टाइफून के संबंध में इसने महत्त्वपूर्ण मदद उपलब्ध कराई है।

प्रमुख चुनौतियाँ

  • यह आयोग शरणार्थी कैंपों में शरणार्थियों के मानवाधिकारों की रक्षा में बहुत सफल नहीं रहा है।
  • वित्तीय कमी के कारण यह वर्तमान सीरियाई शरणार्थियों को नकद सहायता उपलब्ध कराने में असफल रहा है।
  • अधिकांश मामलों में यह शरणार्थियों को समुचित पोषण एवं मानसिक शांति उपलब्ध कराने में असफल रहा है।

निष्कर्षः- कहा जा सकता है कि कुछ चुनौतियों को छोड़कर, संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायोग की वैश्विक स्तर पर शरणार्थियों को मदद उपलब्ध कराने तथा उनके पुनर्वास में अहम भूमिका रही है।

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