भारत में पुलिस सुधार की आवश्यकता पर प्रकाश डालिए। पुलिस सुधार के सम्बंध में सर्वोच्च न्यायालय के दिशा निर्देशों का उल्लेख कीजिए। पुलिस सुधार के संम्बध में कौन से प्रयास किये जाने आवश्यक हैं?

पुलिस व्यवस्था के संम्बध में देश में अभी भी ब्रिटिशकालीन कानून ही लागू है। पुलिस सुधारों की माँग काफी पुरानी है क्योंकि सर्वप्रथम वर्ष 1903 में ही ब्रिटिश शासन के दौरान भारतीय पुलिस आयोग ने इस दिशा में प्रयास किया था। आगे राष्ट्रीय स्तर पर 6 आयोगों का गठन किया गया किंतु किसी भी आयोग की सिफारिश को लागू नहीं किया गया।

            किंतु पुलिस सुधारों की अपरिहार्यता को समझते हुए तत्कालीन केन्द्र सरकार के द्वारा वर्ष 1977 में धर्मवीर आयोग का गठन किया गया। धर्मवीर आयोग के द्वारा आठ रिपोर्टें सौंपी गयी किंतु इन पर अमल नहीं किया गया। वर्ष 1998 में रिवेरो समिति वर्ष 2000 में के. पद्मनाभैया समिति तथा सोली सोराबजी समिति ने भी मानक पुलिस अधिनियम की सिफारिश की किंतु अधिकांश राज्यों ने इन सुधारों को लागू नहीं किया। यही कारण है कि देश में पुलिस सुधारों को दृढ़ता से लागू करने की माँग उठायी जा रही है।

            सबसे बढ़कर पुलिस व्यवस्था में जिस प्रकार से भ्रष्टाचार बढ़ रहा है और साइबर अपराध तथा ऑनलाइन धेखाधड़ी जैसी नयी समस्यायें उत्पन्न हो रही हैं उसके कारण पुलिस व्यवस्था में व्यापक सुधार जरूरी हो गये हैं।

पुलिस सुधार के संम्बध में सर्वोच्च न्यायालय के दिशानिर्देशः

  • सितम्बर 2006 में सर्वोच्च न्यायालय ने पुलिस सुधारों के सम्बंध में ऐतिहासिक फैसला सुनाया। चूँकि सर्वोच्च न्यायालय का यह फैसला  प्रकाश सिंह की जनहित याचिका पर सुनाया गया था अतः इस फैसले को प्रकाश सिंह मामले के नाम से भी जाना जाता है।
  • सर्वोच्च न्यायालय ने दिशानिर्देश जारी करते हुए कहा कि पुलिस पर राज्य सरकार के प्रभाव को कम करने के लिए राज्य सुरक्षा आयोग का गठन किया जाना चाहिए।
  • पुलिस में जाँच एवं कानून व्यवस्था की स्थिति से निपटने के लिए अलग - अलग जाँच इकाइयों का गठन किया जाना चाहिए।
  • पुलिस महानिदेशक, पुलिस महानिरीक्षक एवं अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का कार्यकाल न्यूनतम 2 वर्ष निश्चित किया जाना चाहिए।

पुलिस सुधार के सम्बंध में कौन से उपाय किये जाने आवश्यक हैं?

  • पुलिस सुधार के सम्बंध में सर्वप्रथम सर्वोच्च न्यायालय के द्वारा वर्ष 2006 में दिए गये दिशानिर्देशों को लागू किया जाना चाहिए।
  • पुलिस को वर्तमान समय की आवश्यकताओं के मुताबिक ढालने की जरूरत है। ज्ञातव्य है कि देश की पुलिस 1861 के पुलिस अधिनियम से प्रशासित है।
  • नीति आयोग के अनुसार कानून व्यवस्था को राज्य सूची से हटाकर समवर्ती सूची में शामिल किया जाना चाहिए ताकि प्रारम्भ से ही कानून व्यवस्था के उल्लंघन के मामलों में सीधे केन्द्र सरकार हस्तक्षेप कर सके। इस सुझाव को लागू किया जाना चाहिए।
  • पुलिस प्रशिक्षण में संवेदनशीलता को शामिल कराया जाना चाहिए ताकि आम जनता के प्रति पुलिस के व्यवहार को बदला जा सके। ज्ञातव्य है कि पुलिस पर मानवाधिकार के उल्लंघन से संबंधित कई मामले सामने आये हैं।

निष्कर्षः- निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि देश में पुलिस सुधारों की अपरिहार्य जरूरत है। इस सम्बंध में सर्वोच्च न्यायालय के दिशानिर्देशों के साथ-साथ उपर्युक्त सुझावों को लागू किया जाना जरूरी है।

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