जी. आई. टैग क्या है? भारत में इसकी उत्पत्ति पर प्रकाश डालिए। हाल के समय में भारत में विभिन्न राज्यों के बीच जी.आई. टैग को लेकर जो विवाद सामने आया है, उसके लिए उत्तरदायी प्रमुख कारणों का सविस्तार उल्लेख कीजिए।

जी. आई. टैग, जिसे भौगोलिक संकेतक के नाम से भी जाना जाता है, किसी प्राकृतिक, कृषि या विनिर्मित उत्पाद को प्रदान किया जाता है। जब कोई उत्पाद एक निश्चित भौगोलिक क्षेत्र में 10 वर्ष या उससे अधिक समय से उत्पन्न होता है तो इस निश्चित भौगोलिक क्षेत्र के उत्पादकों को इस उत्पाद के संरक्षण के लिए जीण. आईण. टैग प्राप्त हो जाता है उसके नाम का दुरूपयोग अन्य क्षेत्र के उत्पादकों के द्वारा नहीं किया जा सकता है।

            भारत के द्वारा सर्वप्रथम वर्ष 2003 में विश्व व्यापार संगठन के भौगोलिक संकेतकों के माल (पंजीकरण और संरक्षण) अधिनियम को लागू किया गया। ज्ञातव्य है कि विश्व व्यापार संगठन के द्वारा वर्ष 1999 में भौगोलिक संकेतकों के माल (पंजीकरण एवं संरक्षण) अधिनियम को लागू किया गया था।

            भारत में सर्वप्रथम दार्जिलिंग चाय को 2004-05 में जी. आई. टैग प्रदान किया गया था। हाल ही में आन्ध्रप्रदेश के बंगनपल्ली आम तथा आन्ध्रप्रदेश के एटिकोप्पक्का खिलौने को जी. आई. टैग प्रदान किया गया है। देश में वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रलय के अंतर्गत आने वाले औद्योगिक नीति एवं संव(र्न विभाग के मातहत पेटेंट, डिजायन एवं ट्रेडमार्क के महानियंत्रक के द्वारा भौगोलिक संकेतकों का पंजीकरण किया जाता है।

हाल के समय में विभिन्न राज्यों के बीच भौगोलिक संकेतकों को लेकर उत्पन्न विवादः

  • हाल के समय में पश्चिम बंगाल राज्य एवं ओडिशा राज्य के मध्य ‘रसगुल्ला’ को लेकर उस समय विवाद सामने आया जब दोनों राज्यों की सरकारों के द्वारा ‘रसगुल्ला’ के लिए भौगोलिक संकेतक प्राप्त करने का आवेदन किया गया।

प्रमुख कारणः-

• वर्ष 2011 में पश्चिम बंगाल सरकार के द्वारा कहा गया कि रसगुल्ला की खोज पश्चिम बंगाल में ही हुयी है अतः इसे जी.आई. टैग प्रदान किया जाना चाहिए।

• पश्चिम बंगाल के अनुसार, 1868 ई० में कलकत्ता के एक निवासी नोविन चंद्र दास ने ‘रसगुल्ला’ की खोज की थी। ज्ञातव्य है कि कलकत्ता में रसगुल्ला को ‘रोसोगुल्ला’ कहते हैं।

• दूसरी ओर ओडिशा सरकार ने दावा किया कि ‘रसगुल्ला’ की खोज सर्वप्रथम ओडिशा में हुई थी। यहीं से बंगाली लोगों के द्वारा रसगुल्ला बनाने की विधि् प्राप्त की गयी।

• ओडिशा सरकार ने प्रमाण प्रस्तुत करते हुए कहा कि पुरी के जगन्नाथ मंदिर में भगवान के भोग के लिए कई सदियों पहले से रसगुल्ला चढ़ाया जाता रहा है।

• आडिशा सरकार ने मंदिर के रिकार्डों के साथ-साथ 12वीं सदी के दस्तावेजों को प्रस्तुत किया ताकि रसगुल्ला का जी. आई. टैग उसे प्राप्त हो सके।

• किंतु अंततः इस मामले में पश्चिम बंगाल के तर्कों को मान्यता दी गयी और उसे ‘रसगुल्ला’ के लिए जी. आई. टैग प्रदान कर दिया गया।

निष्कर्षः- निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि भौगोलिक संकेतक एक निश्चित क्षेत्र में उत्पन्न होने वाले उत्पाद को प्रदान किया जाता है ताकि किसी अन्य राज्य के द्वारा इसका दुरुपयोग न किया जा सके। जी०आई० टैग विश्व व्यापार संगठन के नियम के अनुरूप सदस्य देशों के द्वारा प्रदान किया जाता है।

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