प्लांटीबॉडी से आप क्या समझते हैं, सविस्तार उल्लेख कीजिए? प्लांटीबॉडी उत्पादन के प्रमुख उपयोग क्या हैं? साथ ही बताइए कि प्लांटीबॉडी के उपयोग एवं निर्माण से कौन से प्रमुख खतरे सम्बंधित हैं?

प्लांटीबॉडी पौधें के द्वारा निर्मित एंटीबॉडी है। साधारण पौधें के द्वारा एंटीबॉडी का निर्माण नहीं किया जाता है। प्लांटीबॉडी का निर्माण ट्रांसजेसिक अर्थात जी. एम. पादपों के द्वारा किया जाता है। ज्ञातव्य है कि एंटीबॉडी एक प्रकार की ग्लाइकोप्रोटीन होती है, जो मानव एवं जन्तुओं में शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली का एक हिस्सा है।

            जैव प्रौद्योगिकी के तहत रिकॉम्बिनेंट डी. एन. ए. तकनीकी की सहायता से एंटीबॉडी उत्पन्न करने वाले जीन को पौधें में स्थानांतरित करना संभव हो सका है।

            वस्तुतः ट्रांसजेनिक पादप उन पादपों को कहा जाता है जो वांछित जीन के प्रभावों को प्रदर्शित करते हैं। सर्वप्रथम वर्ष 1989 में तंबाकू के पौधे में खरगोश एवं चूहे के जीनों को डालकर कैरोआरएक्स (CaroRx) नामक ट्रांसजेनिक पादप का उत्पादन किया गया।

प्लांटीबॉडी उत्पादन के प्रमुख उपयोगः

  • प्लांटीबॉडी का उपयोग मानव एवं जानवरों में सूक्ष्म जीवों से होने वाले रोगों की पहचान करने एवं उनका इलाज करने में किया जाता है।
  • प्लांटीबॉडी के कारण पौधे स्वयं रोग प्रतिरोधक एवं कीट प्रतिरोधी बन जाते हैं। इसके कारण जीवाणुओं, विषाणुओं, फंगल, नीमेटोड आदि से होने वाले रोगों से पौधें को बचाने में आसानी होती है।
  • प्लांटीबॉडी का उपयोग कृषि सम्बंधी विभिन्न प्रकार की समस्याओं को दूर करने के साथ-साथ मानव में कैंसर जैसी बीमारी के निदान में भी किया जाता है।
  • प्लांटीबॉडी को इबोला बीमारी के लिए उत्तरदायी इबोला विषाणुओं के प्रभाव को नियंत्रित करने में भी कारगर पाया गया है।
  • वर्तमान में विश्व की कई बड़ी फार्माक्यूटिकल कम्पनियाँ एवं शोध संस्थान प्लांटीबॉडी के निर्माण में प्रयासरत हैं। इनका उद्देश्य प्लांटीबॉडी के द्वारा विषाणुजनित बीमारियों को पूरी तरह से समाप्त करना है।

प्लांटीबॉडी के उपयोग से सम्बंधित प्रमुख खतरेः

  • प्लांटीबॉडी के निर्माण से एक ओर जहाँ असाध्य रोगों से लड़ने की संभावना उत्पन्न हुयी है नहीं दूसरी ओर इसके खतरे भी हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि प्लांटीबॉडी का निर्माण करने वाले ट्रांसजेनिक पौधे जंगली पौधें को जेनेटिकली संक्रमित कर सकते हैं।
  • ट्रांसजेनिक पौधें से जंगली पादपों में जीन का स्थानांतरण कई प्रकार से संभव है अतः इससे पर्यावरणीय समस्याओं से सम्बंधित मामले उत्पन्न हो सकते हैं।
  • वर्तमान समय तक दुनिया का कोई भी प्लांटीबॉडी औद्योगिक स्तर पर खरा नहीं उतरा है। सामान्य व्यक्ति में प्लांटीबॉडी के प्रयोग से प्रतिकूल असर हो सकता है क्योंकि प्लांटीबॉडी एंटीजन की तरह व्यवहार कर सकता है।

निष्कर्षः- निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि ट्रांसजेनिक पौधों के द्वारा उत्पन्न एंटीबॉडी प्लांटीबॉडी कहलाता है। इसके प्रयोग में काफी सावधानी बरतने की जरूरत है क्योंकि प्लांटीबॉडी का गलत प्रयोग हानिकारक हो सकता है।

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