भारतीय अर्थव्यवस्था में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों के योगदान का सविस्तार उल्लेख कीजिए। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों को किस प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है? साथ ही बताइए कि इन समस्याओं के निराकरण के लिए सरकार के द्वारा कौन से प्रयास किये गये हैं?

भारतीय अर्थव्यवस्था में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम का उल्लेखनीय योगदान है। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम रोजगार प्रदान करने के साथ उद्यमशीलता के मामले में भी अहम योगदान करता है। सबसे बढ़कर यह क्षेत्र देश के सामाजिक- आर्थिक विकास के साथ-साथ समावेशी विकास को प्रोत्साहित करता है।

            सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम सेवा क्षेत्र के सकल घरेलू उत्पाद में तकरीबन 25 प्रतिशत तथा विनिर्माण क्षेत्र के सकल घरेलू उत्पाद में लगभग 6 प्रतिशत का योगदान देता है। इस क्षेत्र के समुचित प्रशासन एवं समग्र विकास को सुनिश्चित करने के लिए भारत सरकार के द्वारा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रलय का गठन किया गया है।

सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों के समक्ष उपस्थित प्रमुख समस्यायें:-

  • सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों को जोखिमपूर्ण माना जाता है जिसके कारण इस क्षेत्र में समुचित वित्तीय सुविधा नहीं प्राप्त हो पाती है।
  • सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों को बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के उत्पादों से प्रतिस्पर्धा करनी पड़ रही है जबकि 1991 के आर्थिक उदारीकरण से पूर्व कुछ वस्तुओं का उत्पादन सिर्फ सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों के लिए ही आरक्षित था।
  • उदारीकरण के पश्चात भारत में प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने के लिए जिस प्रकार से अर्थव्यवस्था के द्वार खोले गये उससे इस क्षेत्र को कई प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इन समस्याओं के चलते इस क्षेत्र में तालाबंदी का सिलसिला जारी है।

सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम क्षेत्र की समस्याओं के निराकरण के लिए सरकार के द्वारा उठाये गये कदमः

  • सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों के लिए सूक्ष्म वित्त सेवाओं को उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सरकार के द्वारा सिडबी (SIDBI) का गठन किया गया।
  • आगे वर्ष 2015 में सरकार के द्वारा मुद्रा बैंक की स्थापना की गयी। मुद्रा बैंक का उद्देश्य सूक्ष्म वित्तीय संस्थाओं को पुनर्वित्त प्रदान (Refinance) करना है।
  • दूरदराज के क्षेत्रों तक छोटे उद्यमियों को वित्तीय सुविधा उपलब्ध कराने तथा वित्तीय समावेशन के लिए प्रधानमंत्री जन-धन योजना की शुरूआत की गयी है।
  • वर्ष 2000 में सरकार के द्वारा गारंटी निधि की स्थापना की गयी जिसके तहत सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों से सम्बंधित इकाइयाँ 2 करोड़ रुपये तक का कर्ज बिना किसी प्रतिभूति के प्राप्त कर सकती हैं।
  • सबसे बढ़कर वर्तमान में सरकार ने क्लस्टर आधारित दृष्टिकोण को अपनाकर सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों के समुचित विकास का मार्ग अपनाया है।

निष्कर्षः- निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि अर्थव्यवस्था में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों का महत्वपूर्ण योगदान है। यह क्षेत्र विनिर्माण क्षेत्र के साथ-साथ सेवा क्षेत्र की जीडीपी में अहम योगदान करता है।

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