जलवायु परिवर्तन प्रदर्शन सूचकांक, 2018 को जर्मनी के बॉन में आयोजित संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन (कॉप -23) में जारी किया गया। जलवायु परिवर्तन प्रदर्शन सूचकांक जर्मन वॉच नामक पर्यावरण संगठन के द्वारा जारी किया गया। यह सूचकांक प्रतिवर्ष जर्मन वॉच एवं जलवायु एक्शन नेटवर्क के द्वारा जारी किया जाता है।
वर्ष 2018 के जलवायु परिवर्तन प्रदर्शन सूचकांक में कुल 50 देशों एवं यूरोपीय संघ को शामिल किया गया। इस सूचकांक में प्रारम्भ की तीन रैंक किसी भी देश को नहीं प्रदान की गयी है। चतुर्थ एवं पाँचवें स्थान पर क्रमशः स्वीडन एवं लिथुआनिया को रखा गया है। उत्तर कोरिया, ईरान एवं सउदी अरब को सबसे निम्न स्थान पर रखा गया है।
जलवायु परिवर्तन को नियंत्रित करने में इस सूचकांक का महत्वः-
- जलवायु परिवर्तन को नियंत्रित करने में इस सूचकांक की महत्वपूर्ण भूमिका है क्योंकि यह सूचकांक में शामिल देशों के उपर राजनीतिक एवं सामाजिक दबाव बनाकर उन्हें पर्यावरण संरक्षण के अनुकूल नीतियों को लागू करने के लिए प्रोत्साहित करता है।
- यह 58 देशों एवं यूरोपीय संघ के द्वारा किये गये जलवायु संरक्षण के प्रदर्शन का मूल्यांकन करता है तथा उन्हें कार्बन उत्सर्जन में कटौती के लिए प्रेरित करता है।
- उल्लेखनीय है कि इस सूचकांक में शामिल 58 देश एवं यूरोपीय संघ वैश्विक ग्रीनहाऊस गैस के उत्सर्जन में 90 प्रतिशत तक का योगदान करते हैं।
- इस सूचकांक में मानकीकृत मापदण्डों के आधार पर मूल्यांकन की पद्धति अपनायी जाती है ताकि शामिल देशों के द्वारा किये जाने वाले कार्बन उत्सर्जन का समुचित आकलन किया जा सके। इससे इस सूचकांक में शामिल देश कार्बन कटौती एवं पर्यावरण संरक्षण से सम्बंधित कदमों को उठाने के लिए प्रेरित होते हैं।
जलवायु परिवर्तन प्रदर्शन सूचकांक, 2018 में भारत की स्थितिः
- जलवायु परिवर्तन प्रदर्शन सूचकांक, 2018 में भारत की स्थिति में काफी सुधार दर्ज किया गया है। जलवायु परिवर्तन प्रदर्शन सूचकांक, 2018 में भारत को 14वाँ स्थान प्रदान किया गया है जबकि पिछले वर्ष भारत को इस सूचकांक में 20वाँ, स्थान प्रदान किया गया था।
- जलवायु परिवर्तन प्रदर्शन सूचकांक, 2018 में भारत अपने पड़ोसी देश चीन की तुलना में काफी बेहतर स्थिति में है। उल्लेखनीय है कि इस सूचकांक में चीन को 41वाँ स्थान प्रदान किया गया है।
- जलवायु परिवर्तन प्रदर्शन सूचकांक, 2018 में भारत की बेहतर स्थिति जलवायु परिवर्तन को नियंत्रित करने की उसकी प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करती है।
निष्कर्षः- निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि जलवायु परिवर्तन प्रदर्शन सूचकांक, वैश्विक स्तर पर जलवायु परिवर्तन को नियंत्रित करने के लिए विभिन्न देशों को पर्यावरण के अनुकूल नीतियों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करता है। इस सूचकांक में भारत की स्थिति में लगातार सुधार दर्ज किया जा रहा है।