हाल ही में महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र में जहरीले हानिकारक कीटनाशकों के प्रभाव से कई किसानों की मृत्यु हो गयी। इस घटना के लिए उत्तरदायी प्रमुख कारणों का उल्लेख कीजिए। साथ ही बताइए कि एंटीबायोटिक के अंधाधुंध इस्तेमाल के प्रति लोगों को जागरूक बनाने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन के अभियान का क्या महत्व है?

 हाल ही में महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र में हानिकारक कीटनाशकों के प्रभाव से 40 से अधिक किसानों की मृत्यु लिए मोनोक्रोटोफास, फिप्रोनिल प्रेफिनपफोस तथा डायपफेनथिरोन जैसे कीटनाशकों को उत्तरदायी माना जा रहा है। ज्ञातव्य है कि इससे पहले भी मोनोक्रोटोफास, नामक कीटनाशक के कारण बिहार के सारण जिले में वर्ष 2013 में मध्यान्ह भोजन योजना के दौरान वितरित भोजन को खाने से 20 से अधिक बच्चों की मृत्यु हो चुकी है। यदि राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की रिपोर्ट पर गौर किया जाये तो भारत में वर्ष 2015 में कीटनाशकों के जहर से 7000 से अधिक लोगों को जान गँवानी पड़ी है।

जहरीले कीटनाशकों के प्रभाव से होने वाली किसानों की मृत्यु के लिए उत्तरदायी प्रमुख कारणः-

  • जहरीले कीटनाशकों के प्रभाव से होने वाली किसानों की मृत्यु के लिए उत्तरदायी सबसे प्रमुख कारण किसानों की अनभिज्ञता थी। ज्ञातव्य है कि किसान जब कपास एवं सोयाबीन की फसल पर कीटनाशकों का छिड़काव कर रहे थे उस समय कीटनाशक सूँघने के कारण उनकी तबियत खराब हुयी।
  • दूसरा प्रमुख कारण बीज कंपनियों द्वारा बेचे जाने वाले बीटी कॉटन बीज में हर्बीसाइड टॉलरेंट नामक एक प्रतिबंधित जीन का पाया जाना रहा है। इस प्रतिबंधित हर्बीसाइड टॉलरेंट नामक जीन के कारण मोनोक्रोटोफॉस नामक जहरीले कीटनाशक का प्रयोग करना पड़ता है।
  • उल्लेखनीय है कि मोनोक्रोटोफॉस एवं आक्सीडेमीओमिथाइल नामक कीटनाशकों को अत्यधिक विषाक्तता के कारण विश्व स्वास्थ्य संगठन के द्वारा श्रेणी-1 के कीटनाशकों में शामिल किया गया है। श्रेणी-1 के कीटनाशकों को अत्यधिक घातक माना जाता है।
  • भारत में कीटनाशकों की बिक्री एवं उनके उपयोग का समुचित विनियमीकरण नहीं किया जाता जिसके कारण अत्यधिक खतरनाक कीटनाशकों का भी धड़ल्ले से उपयोग किया जाता है।
  • शहरी क्षेत्रों के किसान तो कीटनाशकों के प्रति कुछ जागरूक होते हैं किंतु ग्रामीण क्षेत्र के किसान कीटनाशकों के प्रति अधिक सचेत नहीं होते हैं।
  • भारत में कीटनाशकों का पंजीकरण केन्द्रीय कीटनाशक बोर्ड एवं पंजीकरण कमेटी के द्वारा किया जाता है किंतु इसके पास स्वयं श्रेणी-1 के 10 से अधिक कीटनाशक पंजीकृत हैं।

एंटीबायोटिक के अंधाधुंध इस्तेमाल के प्रति जागरूकता के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन के अभियान का महत्वः

  • एंटीबायोटिक के अंधाधुंध प्रयोग से उत्पन्न होने वाले खतरों के प्रति लोगों को जागरूक बनाने के लिए हाल ही में विश्व स्वास्थ्य संगठन के द्वारा एंटीबायोटिक अभियान शुरू किया गया था। इस अभियान के महत्व को हम निम्न प्रकार से समझ सकते हैं।
  • इस अभियान के द्वारा वैश्विक स्तर पर लोगों को जागरूक बनाया गया कि वे बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक दवाओं का प्रयोग न करें।
  • ज्ञातव्य है कि एंटीबायोटिक के अधिक इस्तेमाल से बैक्टीरिया प्रतिरोधक शक्ति विकसित कर लेते हैं जिससे इनका इलाज करना कठिन हो जाता है। यदि लोग सचेत होंगें तो उनके द्वारा समुचित मात्र में ही एंटीबायोटिक का प्रयोग किया जायेगा। विश्व स्वास्थ्य संगठन के जागरूकता अभियान का प्रमुख उद्देश्य यही था।

निष्कर्षः- निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि कीटनाशकों एवं एंटीबायोटिक दवाओं के समुचित इस्तेमाल के सम्बंध में लोगों को जागरूक बनाने के सम्बंध में विश्व स्वास्थ्य संगठन का हालिया प्रयास सराहनीय है। कीटनाशकों के सम्बंध में जागरूकता के लिए भी इस प्रकार के अभियानों की जरूरत है।

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