प्रकाश प्रदूषण से आप क्या समझते हैं? हाल ही में एक जर्मन पत्रिका साइंस एडवांस के अनुसार वैश्विक स्तर पर प्रकाश प्रदूषण की स्थिति को स्पष्ट कीजिए। साथ ही बताइए कि प्रकाश प्रदूषण मानव स्वास्थ्य एवं जीव-जन्तुओं के स्वास्थ्य को किस प्रकार प्रभावित करता है?

जब कृत्रिम प्रकाश के कारण प्राकृतिक प्रकाश में कमी आने लगती है तो ऐसी स्थिति को प्रकाश प्रदूषण के नाम से जानते हैं। उदाहरण के तौर पर वर्तमान समय में एलईडी लाइट के अधिकाधिक प्रयोग के कारण रात्रि के अंधकार में काफी कमी आती जा रही है। रात्रि के अंधकार में आने वाली यह कमी मानव स्वास्थ्य को गंभीरता से प्रभावित कर रही है।

            हाल ही में एक जर्मन पत्रिका साइंस एडवांस ने अपने एक शोध में उल्लेख किया है कि रात्रि के अंधकार में वर्ष दर वर्ष लगातार कमी आती जा रही है। इसके कारण रात्रि के प्राकृतिक अंधकार में सम्पन्न होने वाली जैविक क्रियायें प्रभावित हो रही हैं। परिणामतः मानव स्वास्थ्य, जीव-जन्तुओं के स्वास्थ्य एवं पारितंत्र पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है।

            पत्रिका साइंस एडवांस के शोध के अनुसार, विश्व के 80 देशों में प्रकाश प्रदूषण में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है। दक्षिण अमेरिका, एशिया के विकासशील देशों एवं अफ्रीका में प्रकाश प्रदूषण की स्थिति गंभीर है। एशिया में सर्वाधिक प्रकाश प्रदूषण हांगकांग में है।

प्रकाश प्रदूषण का मानव स्वास्थ्य पर प्रभावः-

  • प्रकाश प्रदूषण मानव स्वास्थ्य को गंभीरता से प्रभावित कर रहा है। इसके कारण नींद आने की समस्या उत्पन्न हो रही है।
  • उल्लेखनीय है कि प्राकृतिक रूप से उत्पन्न होने वाला मेलाटोनिन नामक हार्मोन प्रकाश प्रदूषण से प्रभावित होता है। मेलाटोनिन नामक हार्मोन मनुष्य की निद्रा एवं जागरण को नियंत्रित करता है।
  • इसी प्रकार प्रकाश प्रदूषण को मधुमेह, अवसाद एवं कैंसर जैसे रोगों के लिए भी उत्तरदायी माना जा रहा है।
  • सबसे बढ़कर प्रकाश प्रदूषण के कारण मनुष्य प्राकृतिक प्रकाश से वंचित हो रहा है जिससे उसकी जैविक क्रियाओं पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।

प्रकाश प्रदूषण का जीव-जन्तुओं के स्वास्थ्य पर प्रभावः-

  • प्रकाश प्रदूषण उन जीव-जन्तुओं के लिए सर्वाधिक हानिकारक है जो रात्रि में सक्रिय होते हैं। उदाहरण के तौर पर चमगादड़, रैकून एवं हिरण जैसे जन्तु रात्रि में ही सक्रिय होते हैं और भोजन की तलाश करते हैं।
  • प्रकाश प्रदूषण कुछ जन्तुओं की प्रजनन प्रक्रिया को भी बाधित कर सकता है क्योंकि मादा समुद्री कछुआ रात के अंधकार में ही अंडा देती है।
  • प्रकाश प्रदूषण के कारण जीव-जन्तुओं की खाद्य श्रृंखला पर भी विपरीत प्रभाव पड़ेगा क्योंकि जो जीव रात्रि में ही भोजन के लिए निकलते हैं वे प्रकाश के कारण बाहर नहीं आयेंगें। खाद्य श्रृंखला के प्रभावित होने से जैवविविधता पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
निष्कर्षः- निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि प्रकाश प्रदूषण लगातार बढ़ता जा रहा है जिससे प्राकृतिक प्रकाश में कमी आ रही है। प्रकाश प्रदूषण मानव स्वास्थ्य के साथ-साथ जीव-जन्तुओं के स्वास्थ्य को भी नकारात्मक रूप में प्रभावित कर रहा है।
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