चीन के द्वारा विश्व व्यापार संगठन से मार्केट इकोनॉमी (Market Economy) के दर्जे की मांग की जा रही है। इसके पीछे चीन का प्रमुख उद्देश्य अपने व्यापार को बढ़ावा देना है। साथ ही यदि चीन मार्केट इकोनॉमी का दर्जा प्राप्त कर लेता है तो उसका सामान आयात करने वाले देश उसके सामान पर एंटी डंपिंग ड्यूटी आरोपित नहीं कर सकेंगे। दूसरे शब्दों में यदि भारत के द्वारा चीन का सामान आयात किया जायेगा तो भारत चीन के सामान पर एंटी डंपिंग ड्यूटी नहीं लगा सकेगा। ज्ञातव्य है कि एंटी डंपिंग ड्यूटी का प्रयोग स्वयं के बाजार को अन्य देशों से किये जाने वाले आयात से बचाना होता है।
मार्केट इकोनॉमी से आपका क्या तात्पर्य है?
- मार्केट इकोनॉमी से तात्पर्य एक ऐसी अर्थव्यवस्था से है जिसमें वस्तुओं के आधार पर कीमत निश्चित की जाती है।
- इस प्रकार मार्केट इकोनॉमी बाजार की शक्तियों के द्वारा संचालित होती है तथा इसमें सरकार का न्यूनतम हस्तक्षेप होता है।
- उल्लेखनीय है कि वर्ष 2001 में विश्व व्यापार संगठन में चीन के प्रोटोकॉल ऑफ एक्सेशन (Protocol of Accession) के तहत चीन को आगामी 15 वर्षो तक के लिए गैर बाजार अर्थव्यवस्था के रूप में शामिल किया गया था तथा 16वें वर्ष इस दर्जे को बढ़ाकर मार्केट इकोनामी करने की बात कही गयी थी।
चीन को मार्केट इकोनामी के दर्जे से अमेरिका एवं भारत को क्या आपत्ति है?
- चीन के द्वारा अपने सामानों को भारी सब्सिडी प्रदान कर कीमतों को नियंत्रित किया जाता है ताकि अन्य देशों के बाजारों पर कब्जा जमाया जा सके। अमेरिका एवं भारत चीन के इसी कदम के कारण उसके मार्केट इकोनॉमी के दर्जे का विरोध कर रहे हैं।
- उल्लेखनीय है कि यदि चीन को मार्केट इकोनॉमी का दर्जा प्रदान कर दिया जाता है तो वह इस प्रकार के कीमत नियंत्रण सम्बन्धी कदमों को उठाने के लिए अधिक स्वतंत्र हो जायेगा।
- अमेरिका के विरोध का एक अन्य कारण यह भी है कि यदि चीन के द्वारा सब्सिडी को आगे भी जारी रखा जाता है तो उससे अमेरिका के उद्योगों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है और अमेरिका में रोजगार में कमी आ सकती है।
- सबसे बढ़कर अमेरिका नहीं चाहता है कि चीन का वैश्विक अर्थव्यवस्था में एकाधिकार स्थापित हो।
- इसी प्रकार भारत भी चीन को मार्केट इकोनॉमी का दर्जा देने के विरुद्ध है क्योंकि इस दर्जे को पाने के बाद चीन के सामानों के ऊपर भारत एंटी डंपिंग ड्यूटी नहीं लगा सकेगा।
- साथ ही इससे चीन के साथ भारत के व्यापार घाटे में और वृद्धि होगी जो कि पहले से ही चिंताजनक बना हुआ है।
निष्कर्षः- निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि चीन को मार्केट इकोनॉमी का दर्जा प्रदान करने से उसके व्यापारिक एकाधिकार पूर्ण रवैये को बल मिलेगा। साथ ही इससे अमेरिका के साथ-साथ भारत जैसी अर्थव्यवस्था को भी नुकसान का सामना करना पड़ेगा।