भारत में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक बेहद चुनौंतीपूर्ण स्थिति से गुजर रह हैं। बैंक सिर्फ एनपीए (Non performing Asset) की समस्या का ही सामना नहीं कर रहे हैं बल्कि वे प्रशासनिक समस्याओं का भी सामना कर रहे हैं। हाल ही में मूडीज की रिपोर्ट में इस बात की पुष्टि की गयी है।
इसी प्रकार स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक के द्वारा भी स्पष्ट किया गया है कि भारत के सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक अपने सबसे खराब दौर से गुजर रहे हैं। सबसे बढ़कर भारतीय रिज़र्व बैंक के द्वारा स्वयं यह बात स्वीकार की गयी है कि बैंकों की स्थिति खराब है। बैंकों की इस स्थिति में सुधार के लिए भारतीय रिज़र्व बैंक ने नौ सूत्रीय फार्मूला भी प्रस्तुत किया है।
सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की स्थिति में सुधार के लिए रिज़र्व बैंक का नौ सूत्रीय फार्मूला
- भारतीय रिज़र्व बैंक के प्रथम फार्मूले में कहा गया है कि बैंक ग्राहकों की मांग के अनुसार वित्तीय उत्पाद प्रस्तुत करें।
- द्वितीय सूत्र में कहा गया है कि बैंकों को सरकार के इंसाल्वेंसी एवं बैंकरप्सी कोड का सहारा लेना होगा तथा अपनी बैलेंस शीट को ठीक करना होगा।
- तीसरे सूत्र में कहा गया है कि बैंकों को विशेष निकायों का गठन करके ग्राहकों की शिकायतों को दूर करन लेने का प्रयास करना होगा।
- चौथे सूत्र में कहा गया है कि बैंकों की कार्यशैली को ठीक करने के लिए बैंकों में कारपोरेट गवर्नेंस को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।
- पाँचवें सूत्र में कहा गया है कि बैंकों में एकाउंटिंग सम्बंधी मानकों को ठीक प्रकार से लागू करने की जरूरत है।
- छठवें सूत्र में कहा गया है कि ग्राहकों से जो शुल्क लिया जाता है उसमें पारदर्शिता लाने की आवश्यकता है।
- सातवें सूत्र में कहा गया है कि बेहतर सेवा के लिए नई तकनीकी को लागू करना जरूरी है।
- आठवें सूत्र में कहा गया है कि बैंकों को लघु एवं मध्यम उद्यमों पर अपना ध्यान केन्द्रित करना चाहिए।
- नौंवें एवं अंतिम सूत्र में कहा गया है कि साइबर अपराधों को रेाकने के लिए पूरी तैयारी की जारी जरूरी है।
रिज़र्व बैंक के नौ सूत्रीय फार्मूले से किस प्रकार के परिवर्तन आयेंगे?
- ग्राहकों की मांग के अनुरूप उत्पादों को प्रस्तुत करने से बैंकों के उत्पादों के प्रति अधिक लोग आकर्षित होंगे। इससे बैंकों को लाभ अर्जित करने में भी मदद मिलेगी।
- बैंकों को एनपीए को नियंत्रित करने तथा अपनी बैलेंस शीट को सुधारने में मदद मिलेगी।
- बैंकों की कार्यप्रणाली में सुधार आयेगा तथा पारदर्शिता में वृद्धि होगी।
- नवीन तकनीकी के प्रयोग से ग्राहकों को दी जाने वाली सेवाओं में सुधार आयेगा।
- देश के विनिर्माण क्षेत्र को सशक्त बनाने में मदद मिलेगी क्योंकि रिज़र्व बैंक के सूत्र में कहा गया है कि बैंकों को लघु एवं मध्यम उद्यमों पर अपना ध्यान केन्द्रित करना चाहिए।
- सबसे बढ़कर रिजर्व बैंक के द्वारा सुझाये गये सूत्रों को ठीक से लागू करने पर वित्तीय संस्थानों को साइबर अपराधें से सुरक्षित करने में भी मदद प्राप्त होगी।
निष्कर्षतः- कहा जा सकता है कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की स्थिति बेहद चिंताजनक है। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की स्थिति में सुधार लाने के लिए रिज़र्व बैंक के सभी नौ सूत्रों को ईमानदारीपूर्वक लागू करना जरूरी होगा।