कार्पोरेट गवर्नेंस पर सेबी (SEBI) के द्वारा नारायण मूर्ति समिति का गठन किया गया था। नारायण मूर्ति समिति की प्रमुख सिफारिशों का उल्लेख कीजिए। साथ ही बताइए कि इन सिफारिशों को लागू करने से क्या प्रभाव पड़ेगा?

कार्पोरेट गवर्नेर्ंस के सम्बंध में सेबी (SEBI) के द्वारा वर्ष 2002 में नारायणमूर्ति की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया था। इस समिति के गठन के पीछे प्रमुख उद्देश्य देश में कार्पोरेट गवर्नेंस की स्थिति में सुधार लाना है।

            उल्लेखनीय है कि कार्पोरेट मामलों में काफी अधिक अनियमितता देखने को मिली है जिसके कारण कम्पनियों के प्रशासन में पारदर्शिता, खुलापन लाने में नारायण मूर्ति समिति की सिफारिशें अहम योगदान कर सकती है। देश में कापोर्रेट गवर्नेंस के सम्बंध में सभी प्रकार के निर्णय कापोर्रेट मामलों के मंत्रलय एवं सेबी (SEBI) के द्वारा लिए जाते हैं।

कार्पोरेट गवर्नेर्ंस के सम्बंध में गठित नारायण मूर्ति समिति की प्रमुख सिफारिशें:

  • कम्पनियों में लेखांकन (Auditing) की प्रक्रिया को नियमित करना तथा लेखांकन करने वाली समितियों को समुचित अधिकार प्रदान करना ताकि वे पूरी स्वायत्तता के साथ कार्य कर सकें।
  • गैर कार्यकारी डायरेक्टरों को जो भुगतान अथवा भरपाई  की जाती है उसके सम्बंध में शेयरधारकों के साथ-साथ बोर्ड ऑफ डायरेक्टर की सहमति जरूरी होगी
  • नियमों एवं आचरण संहिता का निर्माण एवं उन्हें पूरी तरह से लागू किया जाना चाहिए।
  • कार्पोरेट कार्यकारी बोर्ड का गठन किया जाना चाहिए ताकि शेयरधारकों को वार्षिक रिपोर्टो के माध्यम से कम्पनी के समक्ष आने वाले खतरों के सम्बंध में समुचित जानकारी प्रदान की जा सके।
  • वित्तीय निर्णयों के सम्बंध में पूर्ण पारदर्शिता की स्थापना ताकि प्रत्येक शेयरधारक के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
  • कार्पोरेट गवर्नेंस के सम्बंध में नारायण मूर्ति समिति की सिफारिशों को लागू करने के प्रभावः
    • नारायण मूर्ति समिति की सिफारिशों को लागू करने के सम्बंध में कार्पोरेट मामलों के मंत्रलय तथा सेबी के मध्य सहमति बनी है कि इन्हें चरणबद्घ तरीके से लागू किया जायेगा।
    • इन सिफारिशों को लागू करने से कार्पोरेट गवर्नेंस के मामले में पारदर्शिता लायी जा सकेगी।
    • इन सिफारिशों को लागू करने से भ्रष्टाचार को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी तथा सत्यम कम्पनी जैसे घोटाले मामलों को रोका जा सकेगा।
    • उल्लेखनीय है कि वर्ष 2008 में सत्यम कम्पनी के मुख्य कार्यकारी बी. रामलिंगा राजू ने कम्पनी की गलत बैलेंसशीट बनायी तथा कम्पनी को मुनाफे में बताया जबकि वास्तविकता यह थी कि सत्यम कम्पनी भारी घाटे में चल रही थी।
    • शेयरधारकों के हितों की रक्षा होगी तथा कम्पनी के डायरेक्टरों के द्वारा मनमाने निर्णय लेने पर लगाम लगायी जा सकेगी।

निष्कर्षः कहा जा सकता है कि कार्पोरेट गवर्नेंस के सम्बंध में नारायण मूर्ति समिति की सिफारिशें काफी महत्वपूर्ण है। इन सिफारिशों पर समुचित तरीके से अमल करके देश में कार्पोरेट गवर्नेंस की स्थिति को काफी हद तक सुधरा जा सकता है।

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