वर्तमान समय में कोई भी ऐसा व्यक्ति, जो अत्यधिक सीध एवं सरल है समाज में सफल नहीं हो सकता है। सफलता के लिए डिप्लोमैटिक व्यवहार का होना जरूरी है।

  1. वर्तमान समय में कोई भी ऐसा व्यक्ति, जो अत्यधिक सीध एवं सरल है समाज में सफल नहीं हो सकता है। सफलता के लिए डिप्लोमैटिक व्यवहार का होना जरूरी है।

उदाहरण के तौर पर यदि कोई नौकर अपने मालिक के प्रति अनिच्छा प्रदर्शित करे या परिवार के किसी वृद्ध एवं बीमार सदस्य के प्रति परिवार के अन्य सदस्य उपेक्षा का भाव प्रदर्शित करें तो समस्या उत्पन्न हो जायेगी। यही कारण है कि नौकर अपनी नौकरी बचाने तथा परिवार के सदस्य सहृदयता बनाये रखने के लिए ऐसा व्यवहार करते हैं।

इस संबंध में कौटिल्य या चाणक्य ने ठीक ही कहा था कि जिस प्रकार जंगल में सीधे पेड़ को सबसे पहले काटा जाता है उसी प्रकार समाज में सीधे एवं सरल (Straight Forward) स्वभाव के व्यक्ति को सबसे अधिक परेशान होना पड़ता है।

इसी प्रकार सिविल सेवा के क्षेत्र में प्रणाली को सुव्यवस्थित तरीके से संचालित करने एवं कानून व्यवस्था को बनाये रखने के लिए जरूरी होता है कि डिप्लोमैसी का प्रयोग किया जाये। इसका कारण यह है कि सिविल सेवक को प्रतिदिन विभिन्न प्रकार की स्थितियों एवं लोगों का सामना करना पड़ता है तथा उनका समाधान करना होता है।

किंतु डिप्लोमैंसी का प्रयोग हमेशा नैतिकता एवं सार्वजनिक हित के संदर्भ में करना चाहिए न कि स्वार्थी हितों की पूर्ति में। यदि स्वार्थी हितों की पूर्ति एवं भ्रष्टाचार के लिए डिप्लोमैसी का प्रयोग किया जाता है तो यह अनैतिक एवं गैरकानूनी होगा।
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