सहानुभूति, समानुभूति एवं करूणा तीनों के बीच बहुत ही निकट का सम्बंध है किंतु फिर भी इनके मध्य अंतर भी है जिसे समझना अतिआवश्यक है।
सहानुभूति से तात्पर्य किसी निर्बल, असहाय, वृद्ध, विकलांग एवं वंचित के लिए मन में दया की भावना उत्पन्न होने से है। जबकि समानुभूति (Empathy) उपर्युक्त निर्बल, असहाय, वृद्ध, विकलांग एवं वंचित के लिए समान भावना उत्पन्न होने से सम्बंधित हैं दूसरे शब्दों में ऐसी स्थिति एवं मानसिकता की स्थिति में पहुंचना जैसी कि असहाय व्यक्ति या जरूरतमंद व्यक्ति महसूस करता है। करूणा उपर्युक्त सहानुभूति एवं समानुभूति दोनों से अलग है। जब कोई व्यक्ति किसी असहाय, निर्बल तथा समस्या में फँसे व्यक्ति की मदद करता है तो उसे करूणा कहते हैं। वस्तुतः सहानुभूति एवं समानुभूति का सम्बंध भावनाओं से है जबकि करूणा का सम्बंध भावनाओं के क्रियान्वयन से है।
सहानुभूति, समानुभूति एंव करूणा के सम्बंध में उदाहरणः
- यदि कोई व्यक्ति एक छोटे बच्चे को किसी फैक्टरी में काम करते हुए देखता है और दुःख महसूस करता है। उसे बच्चे की स्थिति पर दया आती है कि जिस बच्चे को स्कूल में होना चाहिए वह काम कर रहा है। उस व्यक्ति को इस भावना को सहानुभूति माना जायेगा।
- यदि यही व्यक्ति उस बच्चे की स्थिति के समान ही भावना रखता है तथा दुःखी होता है तो उसे समानुभूति माना जायेगा। कहने का तात्पर्य है कि ठीक उन्हीं परिस्थितियों का स्मरण करना जिस परिस्थिति का सामना उस बच्चे को करना पड़ रहा है।
- किंतु जब यही व्यक्ति उस बच्चे को उस कार्य से मुक्त करवाने के लिए कदम उठाता है और बच्चे की शिक्षा आदि के लिए समुचित प्रबंध करता है तो उसे करूणा माना जायेगा। इस प्रकार करूणा भावनाओं के क्रियान्वयन से सम्बंधित है।
निष्कर्षः निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि सहानुभूति समानुभूति एंव करूणा में नजदीकी सम्बंध होने के बावजूद तीनों के बीच मूलभूत अंतर है। सहानुभूति एवं समानुभूति जहाँ भावनाओं से सम्बंधित है वहीं करूणा भावनाओं को क्रियान्वित करने अथवा व्यवहार रूप से परिणत करने से सम्बंधित है।