सिर्फ सिटीजन चार्टर मात्र का निर्माण कर देने से ही प्रशासन में समुचित बदलाव नहीं आ सकता है। प्रशासन में समुचित बदलाव के लिए उपयुक्त वातावरण एवं दशाओं का निर्माण भी करना होगा, सविस्तार स्पष्ट कीजिए।

सिटीजन चार्टर का उद्देश्य प्रशासन को नगारिक केन्द्रित एवं पारदर्शी बनाना है ताकि प्रत्येक नागरिक बिना किसी व्यवधान के सरकार के द्वारा प्रदत्त सुविधाओं एवं जानकारियों को प्राप्त कर सके। सिटीजन चार्टर को सर्वप्रथम ब्रिटेन में वर्ष 1991 में जारी किया गया था। इसके पश्चात् धीरे-धीरे इसे विश्व के अन्य देशों में भी जारी किया जाने लगा।

            सिटीजन चार्टर के लिए जरूरी है कि इनका निर्माण इस प्रकार से किया जाये ताकि प्रत्येक नागरिक सम्बंधित कार्यालय एवं विभाग के बारे में जरूरी सभी जानकारियों को प्राप्त कर सके। किंतु अधिकांश मामलों में सिटीजन चार्टर का निर्माण समुचित तरीके से नहीं किया जाता है। इसके फलस्वरूप नागरिकों को अनेक प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

            सामान्यतः विभागों के कर्मचारी न तो सिटीजन चार्टर के दर्शन से परिचित होते हैं और न ही उसके मुख्य उद्देश्य एवं विशेषताओं से। सिटीजन चार्टर को उनके द्वारा एक औपचारिकता मात्र माना जाता है।

            भारत में सिटीजन चार्टर क्रियान्वयन के प्रारम्भिक स्तर में ही है। अधिकांश सिटीजन चार्टर न सिर्फ शब्दाडम्बरों से भरे होते हैं बल्कि वे संगठन के ही उद्देश्यों का बखान करते हैं। उनका नागरिकों की सुविधा से अधिक लेना-देना नहीं होता है।

            यही कारण है कि सिटीजन चार्टर के साथ-साथ उपयुक्त परिस्थितियों एवं वातावरण का होना भी जरूरी होता है ताकि इनके वास्तविक उद्देश्य को पूरा किया जा सके।

सिटीजन चार्टर के लिए उपयुक्त दशाओं एवं वातावरण का होना क्यों जरूरी है?

• समाज के वंचित वर्गों विशेषकर गरीबों, दलितों, वृद्धों एवं विकलांगों के लिए प्रत्येक विभाग में उपयुक्त व्यवस्था का होना जरूरी है अन्यथा सिटीजन चार्टर के होने के बावजूद इन वर्गों को कोई लाभ नहीं प्राप्त हो सकेगा।

• सिटीजन चार्टर के उद्देश्यों एवं उन्हें लागू करने के लिए विभागों के कर्मचारियों में संवेदनशीलता का होना जरूरी है। इसके लिए कर्मचारियों के समुचित प्रशिक्षण की व्यवस्था का होना जरूरी है।

• सिटीजन चार्टर के बारे में लोगों में जागरूकता उत्पन्न करने के लिए समुचित पब्लिसिटी की व्यवस्था की जानी आवश्यक है।

• सबसे बढ़कर सिटीजन चार्टर केा निर्मित करते समय सम्बंधित भागीदारों (Stakeholder) से प्रत्येक स्तर पर  सलाह-मशविरा जरूरी है ताकि इसे प्रभावी बनाया जा सके।

• सिटीरजन चार्टर को विभिन्न वर्गों के अनुरूप और दृढ़ प्रतिबद्धता से युक्त होना चाहिए।

निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि सिटीजन चार्टर प्रशासन को नागरिक केन्द्रित बनाने में अहम भूमिका अदा कर सकता है। यही कारण है कि सिर्फ सिटीजन चार्टर को ही निर्मित करना जरूरी नहीं है बल्कि इसके लिए उपयुक्त परिस्थितियों एवं वातावरण का होना भी जरूरी है।

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