क्या नैतिकता एवं कर्त्तव्यपरायणता को शैक्षिक संस्थानों में लिखाया जा सकता है? इस संबंध में समुचित उदाहरण प्रस्तुत करते हुए समझाइए। साथ ही बताइए कि नैतिकता एवं कर्त्तव्यपरायणता मनुष्य के लिए क्यों महत्वपूर्ण हैं?

नैतिकता एवं कर्त्तव्यपरायणता ऐसे गुण हैं जो जीवनभर मनुष्य के काम आते हैं। इन गुणों के विकास में शैक्षिक संस्थानों की बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका होती है। नैतिकता एवं कर्त्तव्यपरायणता व्यक्ति के व्यवहार को समुचित स्वरूप प्रदान करने में अहम भूमिका अदा करते हैं।

            अब बात आती है कि क्या नैतिकता एवं कर्त्तव्यपरायणता के विकास में शैक्षिक संस्थानों की भूमिका होती है। वस्तुतः शैक्षिक संस्थानों के द्वारा नैतिकता एवं कर्त्तव्यपरायणता के साथ-साथ अन्य गुणों के विकास में भी अहम भूमिका अदा की जाती है।

            शैक्षिक संस्थानों में विद्यार्थी अपने अध्यापकों के आचरण का अनुकरण करते हैं। अध्यापकों के द्वारा उन्हें बताया जाता है कि सत्य, अहिंसा और अनुशासन जैसे गुणों का क्या महत्व है। सबसे बढ़कर स्वयं पुस्तकों में भी नैतिकता एवं कर्त्तव्यपरायणता से सम्बंधित पाठ्यसामग्री उपलब्ध रहती है। जिन अध्यापकों के द्वारा यह पाठ्यसामग्री विश्लेषण के साथ विद्यार्थियों के समक्ष प्रस्तुत की जाती है तो उससे विद्यार्थियों पर गहरा प्रभाव पड़ता है। और इन गुणों को वे स्वंय में समाहित करने का प्रयास करते हैं।

            यद्यपि परिवार को प्रथम पाठशाला माना जाता है किंतु विद्यालय में जो अनुशासन होता है वह घर में परिवार के सदस्यों के बीच नहीं मिल पाता है। यही कारण है कि नैतिकता एवं कर्त्तव्यपरायणता जैसे गुणों के विकास में शैक्षिक संस्थानों की बहुत अहम भूमिका होती है।

नैतिकता एवं कर्त्तव्यपरायणता मनुष्य के लिए क्यों महत्वपूर्ण हैं?

• नैतिकता एवं कर्त्तव्यपरायणता मनुष्य के लिए व्यक्तिगत तौर पर तो महत्वपूर्ण है ही साथ ही समाज के लिए भी महत्वपूर्ण हैं। जिस समाज में जितने अधिक लोग नैतिकता एवं कर्त्तव्यपरायणता को मानने वाले होंगे वह समाज उतना ही खुशहाल होगा और प्रगति के मार्ग पर अग्रसर होगा।

• वर्तमान समय में अपराधों की संख्या बढ़ रही है और युवा धार्मिक रूढ़िवाद की ओर बढ़ रहे हैं। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण नैतिकता एवं कर्त्तव्यपरायणता की कमी ही है।

• यही कारण है कि यदि प्रारंभिक अवस्था से ही बच्चों को नैतिकता एवं कर्त्तव्यपरायणता जैसे गुणों से युक्त कर दिया जाये तो भविष्य में वे एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में सामने आयेंगे। इस प्रकार के जिम्मेदार नागरिक मजबूत राष्ट्र की नींव तैयार करेंगे और उसको प्रगति की ओर ले जायेंगे।

निष्कर्षः- निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि नैतिकता एवं कर्त्तव्यपरायणता जैसे गुणों के विकास में शैक्षिक संस्थानों की अहम भूमिका है। नैतिकता एवं कर्त्तव्यपरायणता सिर्फ मानव जीवन के लिए ही नहीं बल्कि समाज एवं राष्ट्र के लिए भी आवश्यक है।
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