यह मामला कार्यस्थल पर महिलाओं के उत्पीड़न से सम्बंधित है अतः कंपनी के कार्यकारी निदेशक होने के कारण यह मेरा विधिक दायित्व बनता है कि मैं सम्बंधित मामले का बिना किसी पक्षपात के निराकरण करूँ।
इस मामले के सम्बंध में मेरे पास निम्न विकल्प उपलब्ध हैं-
1. महिला कर्मचारी के त्यागपत्र को स्वीकार कर लेना तथा मामले को वहीं रोंक देना।
2. महिला के द्वारा लगाये गये आरोपों को गंभीरता से लेना तथा उस सम्बंध में एक जाँच समिति की नियुक्ति करना।
a) प्रत्येक विकल्प का मूल्यांकनः
- प्रथम विकल्प के मूल्यांकन के लिए उसके गुण एवं दोषों का आकलन करना होगा-
गुणः यदि महिला कर्मचारी श्रीमति X के त्यागपत्र को स्वीकार कर लिया जाता है तो मामला वहीं समाप्त हो जायेगा। साथ ही मिस्टर A पर कोई कार्यवाही नहीं होगी जिससे संगठन के लक्ष्यों को प्राप्त करने में कोई समस्या नहीं आयेगी। ज्ञातव्य है कि यदि श्रीमती X की शिकायत पर मिस्टर A पर कार्यवाही की जाती है तो उससे मिस्टर A को निलंबित करना पड़ सकता है।
दोषः यदि श्रीमती X की शिकायत को स्वीकार नहीं किया जाता है तो इससे कम्पनी में कार्यरत अन्य महिला कर्मचारी भी असुरक्षित महसूस करेंगी। सबसे बढ़कर उनके मन में यह धरणा मजबूत होगी कि कंपनी महिलाओं के प्रति संवेदनशील नहीं है। इसका परिणाम अन्य महिला कर्मचारियों के इस्तीफे के रूप में सामने आ सकता है।
इस प्रकार कथन (I) के गुण एवं दोषों का मूल्यांकन करने के पश्चात् हम इस निष्कर्ष पर पहुंचते हैं कि यह कदम न तो नैतिक रूप से उचित होगा और न ही कानूनी रूप से।
- इसी प्रकार इस मामले के सम्बंध में कथन (II) के मूल्यांकन के लिए उसके गुण एवं दोषों का आकलन करना होगा-
गुणः महिला के द्वारा लगाये गये आरोपों को गंभीरता से लेने का परिणाम यह होगा कि शिकायत करने वाली महिला के साथ-साथ अन्य महिला कर्मचारियों के मन में कम्पनी के प्रति सम्मान बढ़ेगा। तथा उन्हें एहसास होगा कि यदि उनके उत्पीड़न का प्रयास किया गया तो कम्पनी उनका साथ देगी।
दोषः चूँकि मामले से स्पष्ट है कि मिस्टर A ने गलती की है तथा महिलाओं के प्रति उनका व्यवहार ठीक नहीं है अतः जाहिर तौर उन्हें सजा मिलेगी और हो सकता है कि उन्हें निलंबित भी करना पड़े। यदि मिस्टर A को निलंबित करना पड़ता है तो इससे कंपनी को एक कुशल कर्मचारी खोना पड़ेगा।
उपर्युक्त दोनों विकल्पों के पक्ष एवं विपक्ष का मूल्यांकन करने के पश्चात् इस मामले के सम्बंध में मेरे द्वारा लिया गया निर्णय-
श्रीमती X के द्वारा की गयी शिकायत को स्वीकार कर लूँगा तथा मिस्टर A से इस सम्बंध में उनका पक्ष भी रखने के लिए कहूँगा।
यदि प्रारंभिक तौर पर मिस्टर A दोषी पाये जाते हैं तो विशाखा मामले में सर्वोच्च न्यायालय के दिशानिर्देश के तहत तीन सदस्यों की समिति का गठन करूँगा। इस तीन सदस्यीय समिति में महिला प्रमुख होगी, एक सदस्य महिला एवं अन्य एक सदस्य किसी गैर सरकारी संगठन से होगा।
इस जाँच समिति की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्यवाही के लिए अनुशंसा की जायेगी।