आजकल समस्त विश्व में आर्थिक विकास पर अधिक जोर दिया जा रहा है। इसके साथ ही साथ, विकास के कारण पैदा होने वाले पर्यावरणीय क्षरण के सम्बंन्ध में चिन्ता भी बढ़ रही है। अनेकों बार, हमारे सामने विकसित कार्यकलापों और पर्यावरणीय गुणता के बीच सीध विरोध दिखाई पड़ता है। विकसित प्रक्रम को रोक देना या उसमें काट-छाँट कर देना भी साध्य नहीं है, और ना ही पर्यावरण के क्षरण को बढ़ने देना उचित है, क्योंकि यह तो हमारे सबके जीवन के लिए ही खतरा है। ऐसी कुछ रणनीतियों पर चर्चा कीजिए, जिनको इस द्वन्द्व का शमन करने के लिए अपनाया जा सकता हो और जो हमें धरणीय (सस्टेनेबल) विकास की ओर ले जा सकती हों।

वर्तमान समय में धारणीय विकास में जोर दिया जा रहा है। धारणीय विकास से तात्पर्य विकास का ऐसा मार्ग अख्तियार करने से है जो पर्यावरण संरक्षण को भी बल प्रदान करता हो।

            आज लगभग सभी विकासशील देश  विकास के मार्ग पर अग्रसर है और भारी मात्र में कार्बन उत्सर्जन कर रहे हैं। इसी प्रकार विकसित देश अपनी भौतिकवादी जीवनशैली को छोड़ने के लिए तैयार नहीं है। अमेरिका जैसे देश पेरिस जलवायु परिवर्तन सम्मेलन से बाहर हो रहे हैं।

            यदि यही स्थिति बनी रही तो सम्भवतः पृथ्वी का अस्तित्व ही संकट में पड़ जायेगा। पृथ्वी का अस्तित्व संकट में न पड़े और साथ ही हम विकास के मार्ग पर भी अग्रसर रहें इसके लिए निम्न साध्य रणनीतियों पर कार्य करना होगा।

  1. ऊर्जा के लिए जीवाश्म ईंधनों का प्रयोग कम से कम करना होगा तथा नवीनीकरणीय ऊर्जा स्त्रोतों पर अधिक बल देना होगा। सौर ऊर्जा, पवन आदि के प्रयोग को बढ़ावा देना होगा।
  • परिवहन के लिए निजी वाहनों के स्थान पर सार्वजनिक वाहनों पर अधिक जोर देना होगा। इस सम्बंध में सीएनजी चालित वाहनों, इलेक्ट्रिक वाहनों आदि का प्रयोग महत्वपूर्ण होगा।
  • पर्यावरण के प्रति लोगों में संवेदनशीलता का विकास किया जाना चाहिए ताकि वे स्वयं पर्यावरण संरक्षण को महत्त्व प्रदान करें। पर्यावरण संरक्षण के प्रति संवेदनशीलता विकसित करने एवं जागरूकता लाने के लिए पाठ्यक्रम में इसे पर्याप्त स्थान प्रदान करने की जरूरत है।
  • सरकारी कार्यालयों इमारतों एवं रिहायशी स्थानों में ऊर्जा की आपूर्ति सौर ऊर्जा जैसे नवीनीकरणीय स्त्रोंतों से की जानी चाहिए। इससे आम जनता भी नवीनीकरणीय ऊर्जा स्त्रोंतों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित होगी।
  • सौर ऊर्जा आदि से सम्बंधित उपकरणों को सब्सिडी पर आम जनता को उपलब्ध कराये जाने चाहिए ताकि वे बिना किसी अतिरिक्त बोझ के इन उपकरणों का प्रयोग कर सकें।
  • सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत सरकार के द्वारा गरीबों को केरोसीन तेल उपलब्ध कराया जाता है। केरोसीन के स्थान पर गरीबों को सौर लालटेन जैसे उपकरण प्रदान किये जा सकते हैं।
  • प्रत्येक व्यावसायिक प्रतिष्ठान के लिए यह अनिवार्य बना दिया जाना चाहिए कि उसके क्रियाकलापों या उत्पादों से पर्यावरण को जो हानि होगी उसकी भरपाई उन्हें करनी होगी।
  • पर्यावरण संरक्षण के सम्बंध में सर्वदलीय सहमति बनायी जानी चाहिए तथा सभी राजनीतिक दलों को आपसी मतभेद भुलाकर पर्यावरण संरक्षण के सम्बंध में कदम उठाने होंगे।
  • पर्यावरण संरक्षण के सम्बंध में गैर सरकारी संगठनों, प्रतिष्ठित लोगों तथा फिल्मी सितारों आदि को जोड़कर व्यापक जागरूकता एवं वृक्षारोपण अभियान संचालित किया जाना चाहिए।

            उपर्युक्त उल्लिखित साध्य रणनीतियों पर कार्य करके हम पर्यावरण को संरक्षित रखते हुए विकास के मार्ग पर अग्रसर हो सकते हैं।

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