मान लीजिए कि आप ऐसी कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सी.ई.ओ.) हैं, जो एक सरकारी विभाग के द्वारा प्रयुक्त विशेषीकृत इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बनाती है। आपने विभाग को उपस्कर की पूर्ति के लिए अपनी बोली पेश कर दी है। आपके ऑफर की गुणता और लागत दोनों आपके प्रतिस्पर्धियों से बेहतर हैं। इस पर भी संबन्धित अधिकारी टेंडर पास करने के लिए मोटी रिश्वत की मांग कर रहा है। ऑर्डर की प्राप्ति ने मिलने का अर्थ होगा उत्पादन रेखा का बन्द कर देना। यह आपके स्वयं के कैरियर को भी प्रभावित कर सकता है। फिर भी, मूल्य - सचेत व्यक्ति के रूप में आप रिश्वत नहीं देना चाहते हैं। रिश्वत देने और ऑर्डर प्राप्त कर लेने, तथा रिश्वत देने से इनकार करने और ऑर्डर को हाथ से निकल जाने-दोनों के लिए, वैध तर्क दिए जा सकते हैं। ये तर्क क्या हो सकते हैं? क्या इस धर्म संकट से बाहर निकलने का कोई बेहतर रास्ता हो सकता है? यदि हां, तो इस तीसरे रास्ते की अच्छाईयों की ओर इंगित करते हुए उसकी रूपरेखा प्रस्तुत कीजिए।

रिश्वत देकर कम्पनी के लिए ऑर्डर प्राप्त कर लेने के सम्बंध में निम्नलिखित तर्क प्रस्तुत किये जा सकते हैः-

  1. कम्पनी के लिए टेण्डर प्राप्त करना बहुत जरूरी है क्योंकि यदि टेण्डर प्राप्त नहीं हुआ तो कम्पनी को अपना उत्पादन बंद करना पड़ सकता है। यदि कम्पनी के उत्पादन को बंद करना पड़ा तो कई कर्मचारियों की नौकरी के लिए संकट उत्पन्न हो सकता है।
  2. चूंकि मेरे ऑफर की गुणवत्ता एवं लागत दोनों बेहतर होने के बावजूद रिश्वत की माँग की जा रही है, अतः साबित होता है कि टेण्डर की प्राप्ति के लिए रिश्वत देना ही होगा। यदि हमारे द्वारा रिश्वत नहीं दी जाती है तो कोई अन्य रिश्वत देकर टेण्डर हासिल कर लेगा। अतः रिश्वत देकर अपनी कम्पनी के लिए टेण्डर प्राप्त कर लेना ही उचित कदम होगा।
  3. रिश्वत नहीं देना स्वयं मेरे भविष्य के लिए भी हानिकारक हो सकता है क्योंकि यदि कम्पनी ही घाटे में होगी तो वह अधिक समय तक अस्तित्व में नहीं रह सकेगी।

रिश्वत न देने से ऑर्डर न प्राप्त करने के पक्ष में निम्न तर्क प्रस्तुत किये जा सकते हैः-

  1. यदि रिश्वत देकर कम्पनी के लिए टेण्डर प्राप्त किया जाता है तो इससे कम्पनी को अधिक व्यय करना हेागा। इस अधिक व्यय की भरपाई के लिए या तो कम्पनी अपने द्वारा उत्पादित सामान की गुणवत्ता में कमी लायेगी या फिर कम्पनी के कर्मचारियों के वेतन आदि में कटौती करेगी।
  2. रिश्वत देने से कंपनी न सिर्फ कानूनी प्रावधानों का उल्लंघन करेगी बल्कि वह नैतिकता का भी उल्लंघन करेगी। ज्ञातव्य है कि कानून में रिश्वत देने को अपराध माना गया है।
  3. सबसे बढ़कर रिश्वत देकर टेण्डर या ऑर्डर प्राप्त करने से एक गलत परम्परा का विकास होगा। यह भ्रष्ट परम्परा कम्पनी, समाज एवं देश तीनों के लिए खतरनाक साबित होगी।

            इस धर्मसंकट से बाहर निकलने के लिए तीसरा रास्ता निम्न प्रकार से हैः-

  • जिस सरकारी विभाग को इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की आपूर्ति करनी है उसके विभाग प्रमुख से मिलकर उन्हें समझाना कि जो कम्पनी रिश्वत देकर ऑर्डर प्राप्त करेगी वह या तो मूल्यों में वृद्धि कर देगी या फिर सामान की गुणवत्ता में कमी कर देगी इसलिए रिश्वत के स्थान पर गुणवत्तापूर्ण सामान की आपूर्ति पर ध्यान देना ही उचित होगा।
  • यदि कम्पनी का विभाग प्रमुख रिश्वत पर अड़ा रहता है तो रिश्वत देने का कदम उठाना उचित होगा, किंतु सारी प्रक्रिया को स्टिंग के माध्यम से रिकॉर्ड करना जरूरी होगा। इसे बाद में सार्वजनिक कर इस भ्रष्ट व्यवस्था का पर्दाफाश करना होगा।

इस तीसरे रास्ते की अच्छाईयाः

  • इससे बिना रिश्वत दिए सही प्रक्रिया का पालन करते हुए टेण्डर प्राप्त करने का रास्ता खुल सकता है।
यदि रिश्वत देना भी पड़ता है तो उसका स्टिंग ऑपरेशन करके उसे सार्वजनिक करने से इस भ्रष्ट प्रक्रिया का पर्दाफाश किया जा सकता है। इससे भविष्य में सरकार एक पारदर्शी प्रक्रिया की व्यवस्था कर सकती है जिसके कारण उसी कम्पनी को टेण्डर प्राप्त होगा जो प्रतिस्पर्धी मूल्य में गुणवत्तापूर्ण सामग्री उपलब्ध कराएगी।
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