मानव समुदायों के सामाजिक व्यवहारों एवं मानदंडों को सामूहिक रुप से संस्कृति की संज्ञा दी जाती है। दूसरे शब्दों मे प्रत्येक मानव समुदाय का अपना एक रहन-सहन, खानपान, वेशभूषा, बोलचाल तथा कलाओं एवं धर्मं की अभिव्यक्ति का तरीका होता है। इन्ही को सामूहिक रुप से संस्कृति का नाम दिया जाता है।
भूमण्डलीकरण के इस युग में संस्कृति का महत्वः-
- त्रिपल तलाक पर केन्द्र सरकार के द्वारा प्रस्तुत विधेयक
- भूमण्डलीकरण की अवधारणा विश्व ग्राम की अवधारणा से सम्बंधित है अर्थात् सम्पूर्ण विश्व एक ग्राम है।
- भूमण्डलीकरण के इस युग में सभी देश एक-दूसरे से किसी न किसी रुप से जुड़ चुके हैं। इन देशों के आपसी जुड़ान को मजबूत बनाने में संस्कृति ने अहम भूमिका अदा की है।
- भूमण्डलीकरण के इस युग में संस्कृति आर्थिक लक्ष्यों को प्राप्त करने में अहम भूमिका अदा करती है। साथ ही राजतीतिक सम्बंधों को भी संस्कृति गहराई से प्रभावित करती है।
विभिन्न देशों के साथ राजनीतिक सम्बंधों को मजबूत बनाने में संस्कृति की भूमिकाः
- राजनीतिक सम्बधों का मजबूत बनाने के संदर्भ में संस्कृति का सर्वोत्तम उपयोग मौर्य शासक अशोक के द्वारा किया गया था। उसने घम्म का प्रचार कर पड़ोसी देशों से मजबूत सम्बंध स्थापित करने का प्रयास किया था।
- वर्तमान समय में भारत सरकार दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों के साथ मजबूत सम्बंध स्थापित करने के लिए सांस्कृतिक तत्वों की मदद ले रही है। ज्ञातव्य है कि इस क्षेत्र के देशों के साथ भारत के सांस्कृतिक सम्बंध प्राचीनकाल से ही बने रहे हैं।
- वर्तमान समय में कूटनीतिक क्षेत्र में सॉफ्ट पावर के रुप में संस्कृति का प्रयोग किया जा रहा है। ज्ञातव्य है कि आज के युग में मात्र सैन्य शक्ति के बल पर किसी देश को पराजित नहीं किया जा सकता है।
विभिन्न देशों के साथ आर्थिक सम्बंधों को मजबूत बनाने में संस्कृति की भूमिकाः
- आर्थिक सम्बधों को मजबूत बनाने में संस्कृति की बहुत बड़ी भूमिका होती है। उदाहरण के तौर पर यदि किसी देश में दूसरे देश की संस्कृति को पसंद किया जाता है तो निश्चित तौर पर उस देश के उत्पादों को भी सम्बंधित देश में पसंद किया जायेगा।
- पर्यटन आदि को बढ़ावा देने में भी संस्कृति की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ज्ञातव्य है कि भारत सरकार के द्वारा बौद्ध सर्किट का विकास किया जा रहा है ताकि उन देशों के नागरिकों को पर्यटन के लिए आकर्षित किया जा सके जो बौद्ध धर्मानुयायी हैं।
- प्रवासी भारतीय भी सांस्कृतिक दूतों का कार्य कर रहे हैं। तथा सम्बंधित देश में अपने देश की संस्कृति का प्रचार-प्रसार करके व्यापारिक सम्बंधों को मजबूती प्रदान करने के कार्य में संलग्न हैं।
निष्कर्षः निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि भूमण्डलीकरणीय के इस युग में संस्कृति की बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका है। संस्कृति राजनीतिक सम्बंधों को मजबूत बनाने के साथ-साथ आर्थिक सम्बंधों को सशक्त बनाने में भी अहम भूमिका अदा करती है।