देश में महिलाओं के ऊपर एसिड हमलों की संख्या दिनोंदिन बढ़ती जा रही है। दरअसल पित्रृसत्तावादी समाज में महिलाओं को न बोलने की इजाजत ही नहीं है। जब कभी कोई महिला किसी पुरुष का प्रस्ताव अस्वीकार कर देती है तो पुरुष प्रतिकार स्वरुप एसिड हमले जैसे कृत्यों का सहारा लेकर महिला को शारीरिक हानि पहुँचाने का प्रयास करता है।
महिलाओं पर होने वाले एसिड हमले किस प्रकार भारतीय समाज की नैतिकता की कमी को प्रदर्शित करते हैं?
- एसिड हमले का उद्देश्य महिला को जान से मारना नहीं बल्कि उसे शारीरिक हानि पहुँचाना होता है। इस प्रकार की घटनाओं वाले समाज को न तो सभ्य माना जा सकता है और न ही नैतिक।
- एसिड हमले से पीड़ित महिला के साथ समाज के द्वारा भी भेदभाव किया जाता है। जिससे महिला को न तो कोई नौकरी मिल पाती है और न ही बेहतर जीवनसाथी।
- इस प्रकार के हमले समाज में व्याप्त पित्रृसत्तावादी सोंच को प्रदर्शित करते हैं जहाँ पुरुष हर प्रकार से महिला को अपने अधीन रखना चाहता है।
एसिड हमलों की बढ़ती संख्या के पीछे सरकार की उदासीनता का उत्तरदायित्वः
- सरकार की उदासीनता के कारण एसिड बड़ी आसानी से बाजार में बिक्री के लिए उपलब्ध मिलता है। जबकि सर्वोच्च न्यायालय एसिड बिक्री को विनियमित करने का आदेश दे चुका है।
- एसिड हमलों से पीड़ित महिलाओं को शीघ्र आर्थिक मदद की जरुरत होती है किंतु सरकारी निष्क्रियता के कारण उन्हें समय पर मदद नहीं मिल पाती है।
- एसिड हमले के दोषियों को काफी लम्बे समय के बाद भी सजा नहीं मिल पाती है जिससे वे ऐसी हरकतों के लिए सही सबक भी नही मिल पाती है।
- एसिड हमले के दोषियों को काफी लम्बे समय के बाद भी सजा नहीं मिल पाती है जिससे वे ऐसी हरकतों के लिए सही सबक भी नहीं प्राप्त कर पाते और बार-बार प्रोत्साहित होते हैं।
इस प्रकार की घटनाओं को नियंत्रित करने के लिए किये जाने वाने उपायः
- एसिड बिक्री को विनियमित किया जाना चाहिए ताकि यह आसानी से उपलब्ध न हो सके।
- एसिड हमले के दोषियों को शीघ्रतिशीघ्र कठोर सजा देने के लिए न्यायाधिकरणों का गठन किया जाना चाहिए तथा एक राष्ट्रीय एसिड हमला परिषद का गठन किया जाना चाहिए।
- एसिड हमले से पीड़ित महिलाओं को शीघ्रतिशीघ्र आर्थिक मदद उपलब्ध करायी जानी चाहिए तथा इन पीड़ितों को सरकारी नौकरियों में आरक्षण प्रदान किया जाना चाहिए।
निष्कर्षः निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि देश में बढ़ते एसिड हमले भारतीय समाज में नैतिकता की कमी तथा सरकार की उदासीनता को प्रदर्शित करते हैं। इन कृत्यों पर नियंत्रण के लिए उपर्युक्त कदमों को उठाये जाने की तत्काल आवश्यकता है।