बॉम्ब चक्रवात से अभिप्राय विस्फोटक एवं विनाशकारी चक्रवातीय दशाओं से है। बॉम्ब चक्रवातों की उत्पति उस समय होती है जब ठण्डी वायु राशि गर्म वायु राशि से टकराती है या मिलती है। सामान्यतः जब ठण्डी आर्कटिक आयु गर्म महासागरीय जल के प्रभाव में आती है तो ऐसे चक्रवातों की उत्पति के लिए अनुकूल दशाओं का निर्माण होता है।
बॉम्ब चक्रवात एक मध्य अक्षांसीय चक्रवात हैं। वायुमण्डलीय दाब में अत्यधिक गिरावट आने से इन चक्रवातों शक्ति मिलती है। इस प्रकार के प्रभाव को विस्फोटक चक्रवातीय अंश (Explosive cyclo genesyis) के नाम से भी जाना जाता है। यह उस समय घटित होता है जब एक तूफान 24 घण्टे के भीतर वायुमण्डलीय दाब में 24 मिलीबार तक की कमी ला देता है।
आगे जैसे-जैसे दाब में तीव्र गिरावट आती है तो वायु इन दो उपर्युक्त वायु राशियों के मध्य मौजूद खाली स्थान को भरने के लिए अग्रसर होती है। इसके कारण तीव्र हवायें चलती हैं जो तूफान को मजबूती प्रदान करती हैं।
बॉम्ब चक्रवात की उत्पत्ति के लिए उत्तरदायी प्रमुख कारणः
- बॉम्ब चक्रवात की उत्पत्ति के पीछे सबसे प्रमुख कारण वायुमण्डलीय दाब में आने वाली अत्यधिक गिरावट है।
- बॉम्ब चक्रवात सामान्यतः उत्तरी अमेरिका के समुद्र तटीय हिस्सों में उत्पन्न होते हैं। इनके कारण घोर ठण्ड के साथ बर्फबारी देखने को मिलती है। बॉम्ब चक्रवात की उत्पत्ति में पोलर वोर्टेक्स (Polar vortex) की अहम भूमिका होती है। ज्ञातव्य है कि पोलर वोर्टेक्स एक ठण्डी वायु है जो आर्किटिक के ठण्डे क्षेत्र केर ऊपर विधामान रहती है।
- यही पोलर वोर्टेक्स नामक ठण्डी वायु जब अटलांटिक के गर्म जल के सम्पर्क में आती है तो बॉम्ब चक्रवात के लिए अनुकूल दशाओं का निर्माण होता है।
बॉम्ब चक्रवात उत्तरी गोलाई के मौसम को किस प्रकार प्रभावित करते हैं?
- बॉम्ब चक्रवात के कारण उत्तरी गोलार्द्ध मे स्थित कई क्षेत्रों विशेषकर उत्तरी अमेरिका के पूर्वी हिस्से को भीषण ठंड एवं बर्फबारी का सामना करना पड़ता है।
- बढ़ते जलवायु परिवर्तन ध्रुवीय क्षेत्रों में जेट स्ट्रीम को कमजोर कर दिया है जिसके कारण इसका प्रसार उत्तरी पूर्वी अमेरिका तक हो जाता है। फलस्वरुप बॉम्ब चक्रवात उत्पन्न होते हैं जो भीषण जान एवं माल की हानि करते हैं।
निष्कर्षः निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि बॉम्ब चक्रवात चरम मौसमी घटनायें हैं। इनकी उत्पत्ति गर्म वायुराशि एवं ठण्डी वायुराशि के आपस में टकराने से होती है। इन चक्रवातों के कारण उत्तरी गोलाई में काफी जान एवं माल की हानि होती है।