सूती वस्त्र उद्योग भारह्रसी उद्योग नहीं है अर्थात इसमें प्रयुक्त होने वाले कच्चे माल के भार में अधिक कमी नहीं आती है। कपास से धागा बनता है जिसका प्रयोग कपड़ा बनाने में किया जाता है। इसके परिवहन में भी कोई विशेष समस्या नहीं आती है अतः सूती वस्त्र उद्योग के लिए यह जरुरी नहीं है कि इनकी स्थापना कच्चे माल के नजदीक वाले क्षेत्रों में की जाय।
यही कारण है कि सूती वस्त्र उद्योगों की स्थापना में अन्य कारकों मसलन बाजार की निकटता, सस्ते श्रम आपूर्ति, ऊर्जा की उपलब्धता, पूंजी की उपलब्धता एवं रंगने तथा ब्लीचिंग आदि के लिए जल स्त्रोत से निकटता अधिक महत्वपूर्ण है। भारत के पश्चिमी तट में स्थित राज्यों में इन कारकों की उपलब्धता के चलते यहाँ सूती वस्त्र उद्योगों की स्थापना के लिए अनुकूल दशायें प्राप्त होती हैं।
क्या कारण हैं कि भारत के पश्चिमी तट में स्थित राज्यों में सूती वस्त्र उद्योगों की स्थापना की जाती है?
- पश्चिम तटीय राज्यों में काली मिट्टी की बहुलता है। इस काली मिट्टी वाले क्षेत्र में कपास का बहुतायत में उत्पादन होता है।
- पश्चिमी तटीय राज्यों की जलवायु नमीयुक्त होती है जिसके कारण कपास के धागे काफी मजबूत होते हैं। ज्ञातव्य है कि शुल्क जलवायु के कपास के धागे काफी कमजोर होते हैं।
- पश्चिम तटीय राज्यों में भारत के महत्वपूर्ण बंदरगाह स्थित हैं जिसके कारण आयात एवं निर्यात दोनो आसान होते हैं। मिस्र जैसे देशों से लम्बे रेशे वाली कपास का आयात किया जाता है।
- पश्चिमी तट में ऊर्जा की समुचित उपलब्धता भी रहती है। पश्चिमी घाट में स्थित टाटा जलविद्युत ग्रिड से आसानी से पर्याप्त ऊर्जा की प्राप्ति हो जाती है जो कि उद्योगों के संचालन के लिए महत्वपूर्ण जरुरत है।
- अहमदाबाद एवं मुंबई रेलवे, सड़क एवं समुद्री मार्ग से बेहतर ढंग से जुड़े हुए हैं। इस कारण से परिवहन की बेहतर सुविधा भी उपलब्ध है।
- सूती वस्त्र उद्योगों में रंगने एवं ब्लीचिंग के लिए जल की आवश्यकता होती है। इसकी पूर्ति मीठी नदी के स्वच्छ एवं मृदु जल से हो जाती है।
- गुजरात एवं महाराष्ट्र में उद्योगों की बहुलता तथा सम्पन्नता के कारण पूँजी बहुत आसानी से उपलब्ध हो जाती है।
- गुजरात एवं महाराष्ट्र में बड़ी संख्या में सस्ते, कुशल श्रमिक मिल जाते हैं जिससे उद्योगों के विकास में सहायता मिलती है।
- गुजरात एवं महाराष्ट्र में एक बड़ा बाजार भी है यह कारक भी सूती वस्त्र उद्योगों की स्थापनपा में अहम भूमिका अदा करता है।
निष्कर्षः निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि सूतीवस्त्र उद्योग भारह्रासी उद्योग नहीं है अतः इसकी स्थापना कच्चे माल के स्रोतों के समीप अनिवार्य नहीं है। पश्चिमी तट में स्थित राज्यों में सूती वस्त्र उद्योगों की स्थापना के लिए सभी आवश्यक कारक पाये जाते हैं अतः इन राज्यों में बड़ी संख्या में सूती वस्त्र उद्योगों की स्थापना हुयी है।